तीस हजार फीट की ऊंचाई पर राफेल में ऐसे भरा गया ईंधन

नई दिल्ली।

पांच राफेल विमान बुधवार तक अंबाला स्थित वायुसेना की छावनी में पहुंच जाएंगे। करीब 7 हजार किलोमीटर का सफर तय करते हुए ये विमान अंबाला पहुंचेंगे। इससे पहले मंगलवार को इन विमानों की 30 हजार फीट की ऊंचाई पर ईंधन भरते तस्वीरें सामने आईं। फ्रांस एयर फोर्स के टैंकर से ईंधन भरते हुए तस्वीरों को फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास ने ट्विटर पर शेयर किया। इंडियन एयर फोर्स ने ट्वीट कर इस मदद के लिए फ्रांस एयर फोर्स का शुक्रिया अदा किया। अब हम आपको बताते हैं कि कैसे विमानों को बिना बेस पर लाए हवा में ही ईंधन भरने का कार्य किया जाता है…

प्रोब एंड ड्रोग… तकनीक

इसमें एक टैंकर विमान होता है जिसमें विमानों का ईंधन रखा जाता है। इससे कुछ दूरी पर दूसरा विमान होता है जिसमें ईंधन भरा जाना होता है।

97 साल पहले ये होता था

लड़ाकू विमानों में पहले हवा में ईंधन भरने की कोई तकनीक नहीं थी। विमानों को बेस पर लाने के बाद ही उनमें ईंधन भरा जाता था। इसमें टाइम लगता था। 27 जून 1923 को सैन डियागो-कैलिफोर्निया एयरबेस पर पहली बार एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सफलता से हुई थी।

एक रफ्तार, एक ही ऊंचाई

हवा में ईंधन भरने के लिए करीब 10 मिनट का समय लगता है। इस दौरान दोनों विमानों में रेडियो तकनीकी नैविगेशन सिस्टम के जरिये संपर्क रहता है। ईंधन भरते वक्त दोनों विमानों को लगभग एक ही रफ्तार और ऊंचाई बरकरार रखनी होती है।

‘तेजस’ में भारत को पहली कामयाबी : भारतीय वायुसेना को पहली बार 10 सितंबर 2018 को 20 हजार फीट की ऊंचाई पर वायुसेना के एमकेआई टैंकर विमान आईएल-78 के जरिये तेजस एलएसपी-8 विमान में 1900 किलोग्राम ईंधन भरने में कामयाबी हासिल हुई। वायु सेना अब युद्ध के दौरान विमानों में हवा में ईंधन भरने में सक्षम है।

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