सुपर स्पेशलिटी हुआ अब कोविड जीरो

एकमात्र बची महिला मरीज भी चेस्ट सेंटर रैफर, अब 10 सेंटर बनाकर वैक्सीनेशन शुरू

इंदौर (नगर संवाददाता)। करीब एक माह से कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में कमी आने से अब शहरवासियों ही नहीं बल्कि प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को भी राहत है। वर्तमान में 500 से भी कम मरीज उपचाररत हैं जिनमें से 90 फीसदी होम आइसोलेट हैं। एक खास राहत वाली बात यह कि छह कोविड अस्पतालों में से एक सुपर स्पेशिलटी अब कोरोना मरीजों से मुक्त हो गया है। अब यहां कोरोना मरीज न तो है और न ही भर्ती किए जाएंगे। अब यह अपने मूल मकसद वाले प्रोजेक्ट के तहत संचालित होगा। फिलहाल यहां अन्य बिमारियों के कुछ मरीज भर्ती हैं।

सितम्बर 2020 में कोरोना का संक्रमण चरम पर था और निजी अस्पताल मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे थे। स्थिति यह हो गई थी कि एमआरटीबी, एमटीएच, अरबिंदो, इंडेक्स, चोइथराम आदि कोविड अस्पताल में बेड फुल हो गए थे। तब विशेष परिस्थिति में सुपर स्पेशलिटी को भी कोरोना मरीजों के लिए चालू किया गया था। सितम्बर में यहां स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वॉरियर्स को ही भर्ती किया गया था।

पहले दौर में 35 संक्रमित डॉक्टर्स को भर्ती किया गया। इसके बाद तो मरीज बढ़ते गए और फिर सामान्यजन के लिए भी इसे लागू कर दिया। कुछ समय बाद सुपर स्पेशलिटी के तीन फ्लोर कोरोना मरीजों के लिए तैयार कर दिए गए और बीते पांच महीनों में एक समय ऐसा भी आया जब यहां 200 से ज्यादा मरीज भर्ती थे। खास बात यह कि यहां शुरू से ही सारी व्यवस्थाएं अनुकूल रही। मरीजों का इलाज और सुविधाएं निजी अस्पतालों से भी बेहतर रही। धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम हुई। सबसे बेहतर जनवरी 2021 रहा जब मरीजों की संख्या में काफी कमी आई। पिछले पखवाड़े अस्पताल में 10 मरीज रह गए थे। गुरुवार को एक लीला नामक महिला ही रही जिसकी भी रिपोर्ट नेगेटिव थी। बाद में उसे चेस्ट सेंटर रैफर कर दिया गया।

इस तरह अब अस्पताल कोरोना मरीजों से मुक्त हो गया। अब नए मरीज भी यहां नहीं आ रहे हैं, इसके चलते यह अस्पताल में अन्य बिमारियों का इलाज हो सकेगा। फिलहाल इस हफ्ते से यहां वैक्सीनेशन भी शुरू किया गया है जिसके लिए 10 सेंटर बनाए गए हैं। अभी यहां वैक्सीनेशन लम्बे समय चलेगा। जल्द ही अस्पताल में अब किडनी, आर्थोपैडिक, अस्थमा सहित अन्य बिमारियों के मरीजों का संपूर्ण इलाज होगा। यहां विश्व स्तरीय न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, नेफ्रालॉजी, कॉर्डियोलॉजी, यूरो सर्जरी, गेस्ट्रोइन्लॉजी, सर्जिकल गेस्ट्रोइन्लॉजी, प्लास्टिक व रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के साथ आर्गन ट्रांसप्लांट की सुविधाएं होगी।

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