सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग़ पर नियुक्त किए तीन मध्यस्थ

नई दिल्ली


आखिर ये तीन ही क्यों ही चुने गए मध्यस्थ

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग के प्रदर्शन को लेकर एक याचिका की सुनवाई की। प्रदर्शनकारियों से बातचीत और प्रदर्शन की जगह बदलने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तीन लोगों को मध्यस्थ नियुक्त किया है.इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े, मध्यस्थता विशेषज्ञ साधना रामचंद्रन और पूर्व आईएएस और देश के पहले अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह शामिल किए गए हैं।

संजय हेगड़े… मॉबलिंचिंग के खिलाफ लड़े

संजय हेगड़े सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं। हाल ही में संजय तब सुर्खियों में आए, जब एक नाज़ी-विरोधी तस्वीर पोस्ट करने के बाद ट्विटर ने उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया था। संजय राष्ट्रीय नागरिकता सूची से निकाले गए लोगों, मॉब लिंचिंग मामलों और आरे जंगल के पक्ष में कोर्ट में पेश हो चुके हैं।

साधना रामचंद्रन… मध्यस्थता में माहिर

वरिष्ठ वकील है, जो मध्यस्थता में निपुण हैं। वह ‘माध्यम इंटरनेशनल’ की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। साधना 1978 से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं। वह कई बरसों तक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़ी रही हैं और बाल अधिकारों, शिक्षा से जुड़ी कई मानवाधिकार जांचों का हिस्सा रही हैं।

वजाहत हबीबुल्लाह… पहले सूचना आयुक्त

1968 बैच के आईएएस अफसर। रिटायरमेंट के बाद अक्तूबर 2005 में देश के पहले मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किए गए। 2010 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 2011 में उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने कश्मीर को केंद्र-शासित प्रदेश बनाने की आलोचना की थी।

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