आंदोलनों की मौजूदा लहर एक बार फिर हमारे लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत बनाएगी-प्रणव मुखर्जी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। बीजेपी और केंद्र सरकार ने सीएए पर हो रहे प्रदर्शनों की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी ने कहा कि शाहीन बाग अब शेम बाग में बदल गया है। जहां नए कानून को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, उसी बीच प्रणब मुखर्जी की ये बातें सच में हिम्मत देने का काम करेंगी।

सीएए के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र के मूल तत्व हैं।

कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे मुखर्जी ने विरोध प्रदर्शनों पर कहा कि देश में शांतिपूर्ण आंदोलनों की मौजूदा लहर एक बार फिर हमारे लोकतंत्र की जड़ों को गहरा और मजबूत बनाएगी। यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे प्रणब के इस बयान से बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा हो सकती है।

वैसे, प्रणब के बारे में माना जाता है कि वह मोदी सरकार के प्रति नरम रुख रखते हैं। पीएम मोदी और उनके बीच संबंध काफी अच्छे हैं। यहां तक कि वह नागपुर में आरएसएस के एक कार्यक्रम में भी शरीक हो चुके हैं, जिससे कांग्रेस असहज स्थिति में आ गई थी। मोदी सरकार के दौरान ही प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया था।

मुखर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा आयोजित पहले सुकुमार सेन स्मृति लेक्चर में कहा, ‘भारतीय लोकतंत्र समय की कसौटी पर हर बार खरा उतरा है। पिछले कुछ महीनों में विभिन्न मुद्दों पर लोग सड़कों पर उतरे, खासकर युवाओं ने इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी आवाज को मुखर किया। संविधान में इनकी आस्था दिल को छूने वाली बात है।’

नागरिकता संशोधन कानून हो या एनआरसी या यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि का मुद्दा विरोध-प्रदर्शन और अपनी राय जाहिर करने देशभर में लोग सड़कों पर उतरे हैं जिनमें अधिकांश युवा हैं।

विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्हाेंने कहा, “मेरा मानना है कि देश में शांतिपूर्ण आंदोलनों की मौजूदा लहर एक बार फिर हमारे लोकतंत्र की जड़ों को गहरा और मजबूत बनाएगी।”

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