आज की बैठक में जो फैसला लिया गया है वो अभी तक हुए सबसे बड़े फैसलों में शामिल है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

प्रधानमंत्री ने आज यानी सोमवार को कोरोना को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैबिनेट की बैठक की। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया। गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बैठक के दौरान एक-दूसरे से दूर बैठे नजर आए।

इस बैठक में इस महामारी से लेकर तमाम मुद्दों पर फैसले लिए गए और लॉकडाउन खत्म होने के बाद कुछ मुद्दों की लिस्ट बनाने के लिए पीएम ने आदेश दिए।

कोरोना संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्री मंडल के सभी मंत्रियों, सभी दलों के सांसदों ने एक साल तक अपने वेतन का 30% हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। कैबिनेट ने आज इस संबंध में एक अध्यादेश जारी किया है।

मोदी ने मंत्रियों से कहा, “लॉकडाउन खत्म होने के बाद 10 फैसलों और 10 प्राथमिकताओं की एक सूची बनाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सभी की ओर से लगातार मिल रही प्रतिक्रियाएं इस आपदा से निपटने की रणनीति बनाने में प्रभावी रही हैं। सरकार कटाई के इस सीजन में किसानों की हर संभव मदद करेगी। उन्होंने किसानों को मंडियों से जोड़ने के लिए कैब सर्विस की तर्ज पर ऐप आधारित ट्रक सेवा उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया है।”

प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद अधिनियम, 1954 के सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 1 अप्रैल, 2020 से एक साल के लिए भत्ते और पेंशन को 30% तक कम किया जाएगा।

इस पर प्रकाश जावड़ेकर ने बताया,  “सांसदों को हर साल मिलने वाली निधि या एमपी लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड MPLADS भी 2 साल के लिए निलंबित कर दिया गया है। इस मद में सांसदों को जो हर साल दस दस करोड़ रुपए की राशि मिलती है, वह कंसोलिडेटेड फंड ऑफ़ इंडिया में जमा होंगे, ताकि उससे कोरोना वायरस के दंश से लड़ा जा सके।”

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस बात पर फैसला हुआ। पीएम, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सभी राज्यपाल और सांसद 1 साल तक अपने वेतन का 30 फ़ीसदी हिस्सा अपनी स्वेच्छा से नहीं लेंगे।

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