ऑनलाइन क्लास से बच्चे कितने शिक्षित हुए इसका आंकड़ा तो नहीं आया लेकिन डिवाइस से मानसिक स्वास्थ्य जरूर बिगड़ गया

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

लॉकडाउन के कारण सभी स्कूल से लेकर कॉलेज बंद कर दिए गये तथा ऑनलाइन क्लास शुरू की गई। जिसमें ज़ूम एप के द्वारा बच्चों को घर से ही पढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

अब इससे बच्चे कितने शिक्षित हुए इसका आंकड़ा तो नहीं आया लेकिन वो इन डिवाइस की जकड़ में कितने प्रतिशत आ गए हैं इसका आंकड़ा जरूर जारी किया गया है।

65 प्रतिशत बच्चों को डिवाइस लत लग गई है

अभी हाल के महीनों में लगभग 65 प्रतिशत बच्चों को डिवाइस (मोबाइल, कंप्यूटर) की ऐसी लत लग गई है कि, वे इससे आधा घंटे के लिए भी दूर नहीं रह पा रहे हैं। डिवाइस को छोड़ने के लिए कहने पर बच्चे गुस्सा हो रहे हैं, रोना शुरू कर देते हैं और वे माता-पिता की बात नहीं सुन रहे हैं।

जयपुर स्थित राजस्थान में बच्चों के सबसे बड़े जे.के लोन अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा बाल स्वास्थ्य पर कोविड-19 लॉकडाउन के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए किए गए एक सर्वे में, ये तथ्य सामने आए हैं।

आंकड़े हैरान करने वाले, परिजनों को ध्यान देने की जरूरत

इस सर्वे में अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने 203 बच्चों पर अध्ययन किया। सर्वे में माना गया कि 72.7 फीसदी बच्चों ने शारीरिक समस्याओं के बारे में बताया। इनमें 23.40 फीसदी बच्चों का वजन बढ़ा तो 26.90 फीसदी बच्चों ने सिरदर्द व चिड़चिड़ापन की शिकायत की। 22.40 फीसदी बच्चों ने आंखों की समस्याओं के बारे में बताया।

सर्वे में यह सामने आया है कि लॉकडाउन के दिनों में हाई स्क्रीन एक्सपोजर वाले 70.70 प्रतिशत छात्रों को व्यवहार संबंधी समस्याएं आई हैं। इसके अलावा 23.90 प्रतिशत ने अपनी दैनिक दिनचर्या को ही छोड़ दिया है, 20.90 प्रतिशत लापरवाह हो गए, 36.80 प्रतिशत जिद्दी हो गए और 17.40 प्रतिशत ने ध्यान कम लगने के बारे में बताया।

वहीं मनोविश्लेषकों का मानना है कि ऑनलाइन पढ़ाई माध्यमिक कक्षा के बच्चों के लिए ठीक है, लेकिन कई प्ले स्कूल एवं प्रारंभिक स्कूलों द्वारा भी छोटे उम्र के बच्चों के लिए भी ऑनलाइन माध्यम से पाठ्यक्रम शुरू की गई है। ऐसे में अभिभावकों को विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है।

मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है

अध्ययन की परिकल्पना बाल रोग विभाग के चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अशोक गुप्ता ने की। कोविड-19 महामारी के कारण और लॉकडाउन को मद्देनजर, अध्ययन के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्मों और सोशल मीडिया पर डेटा एकत्र किया गया और डेटा एकत्र करने के लिए नवीनतम और मानक प्रश्नावली का उपयोग किया गया।

इस पूरे अध्ययन में यही निष्कर्ष निकाला गया कि कोविड-19 और लॉकडाउन का बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके साथ ही उन्हें बेहतर नींद नहीं मिली और उन्हें मानसिक विकार का सामना पड़ा है।

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