वुहान से वापस आने वाले कोरोना प्रभावित भारतीय लोगों को बचाने के लिए आगे आई भारतीय सेना

विभव देव शुक्ला

दुनिया के सामने फिलहाल एक बड़ा खतरा है, जिसके चलते सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हज़ारों लोग इसकी जद में आ चुके हैं। हमारे देश में भी उस ख़तरे की चर्चा ज़ोरों पर है, चर्चा से नतीजा भले न निकले पर उससे जागरूकता ज़रूर फैलाई जा सकती है। कोरोना वायरस से अब तक 150 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं और अभी तक इस वायरस का कोई पुख्ता इलाज सामने नहीं आया है।

केरल के छात्र का पहला मामला
इस साल कोरोना वायरस का ज़िक्र सबसे पहले चीन के वुहान शहर में हुआ। वुहान में भारत के भी तमाम छात्र पढ़ते हैं, जिन्हें वापस भारत बुलाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हाल ही में वुहान में पढ़ने वाले केरल के एक छात्र का कोरोना वायरस से प्रभावित होने का मामला सामने आया है। जिसके बाद केरल के स्वास्थ्य विभाग ने छात्र को उचित देखरेख में रखने का आदेश जारी किया था।

300 छात्रों की निगरानी की जगह
लेकिन वुहान में मौजूद भारतीय छात्रों के लिए महज़ इतना सही नहीं होगा। लिहाज़ा भारतीय सेना ने मामले से निपटने के लिए मोर्चा संभाला है। भारतीय सेना ने गुरुग्राम से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मानेसर में चीन से आए भारतीय छात्रों के ठहरने के लिए इंतज़ाम किया है। एएनआई में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक भारतीय सेना ने एक जगह तैयार की है। उसमें वुहान से आए लगभग 300 छात्रों की निगरानी और देखभाल होगी। आगामी एक हफ्ते तक चिकित्सक उन छात्रों की जांच करेंगे।

600 परिवारों के लिए अलग इंतज़ाम
सेना का कहना है कि छात्रों की जांच और देखरेख दो तरीक़े से होगी। पहला हवाई अड्डे पर और क्वारंटाइन के ज़रिये। दूसरा अगर कोई प्रभावित मामला सामने आता है तो उसे दिल्ली कैंटोनमेंट स्थित बेस अस्पताल में सबसे अलग भर्ती कराया जाएगा। क्वारंटाइन उस अवधि को कहा जाता है,
जिसमें किसी बीमारी से प्रभावित जीव को अलग से निगरानी में रखा जाता है। इसके अलावा भारत तिब्बतीय सीमा पुलिसबल ने छावला कैंप दिल्ली में क्वारंटाइन बनाया है। इसमें चीन के वुहान से वापस आने वाले 600 परिवारों के ठहरने का इंतज़ाम होगा। परिवार और उनके बच्चे हवाई अड्डे से सीधे यहीं भेजे जाएंगे।

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