जज बच्ची की बनाई तस्वीर देख कर अवाक् रह गए, पैरेंट्स को बोला दोबारा सोच लें

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। कल ‘मैरिज स्टोरी’ देख रही थी। दो घंटे की हॉलीवुड फ़िल्म है जिसमें माँ-बाप लगातार झगड़ते हैं लेकिन बच्चे के सामने नहीं पर बच्चे को पता होता है कि वो तलाक ले रहे हैं। बच्चा बस एक ही बात बोलता है ‘मैं खुश हूँ, यहां अच्छा स्कूल है फैमिली है बस उसमें आप नहीं हो पापा।’

ये सुनने के बाद बिल्कुल दिमाग ब्लैंक हो जाता है। न जाने रोज़ कितने लोग तलाक लेते होंगे और उनके बच्चे कुछ इसी तरह के मानसिक स्थिति से गुजरते होंगे। इसी बीच भोपाल की ये घटना पढ़ कर आपको एहसास होगा की हम कितना ज़्यादा रिलेशनशिप को कॉम्प्लीकेट करते जा रहे हैं।

दरअसल काेटरा सुल्तानाबाद निवासी महिला ने प्राधिकरण में शिकायत की थी कि उसका पति उसे प्रताड़ित करता है। उनकी शादी 18 नवंबर 2011 काे उदयपुर में हुई थी। उसका पति विद्या पाॅलिटेक्निक काॅलेज में कार्यरत है।

1 जनवरी 2013 काे उसने बच्ची काे जन्म दिया। इस बीच उसने एक स्कूल में नाैकरी की। ससुर की माैत के बाद पति ज्यादा प्रताड़ित करने लगा। इसके बाद वह बच्ची के साथ भाेपाल बीएड करने आ गई। महिला को बच्ची और खुद के लिए भरण-पाेषण चाहिए।

काउंसलिंग के दौरान जज ने पति और पत्नी को बुलाया। कोर्ट में ही पति-पत्नी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे, वहीं कोने में ही एक बच्ची काॅपी पर कुछ बना रही थी। अचानक जज आशुतोष मिश्रा की नजर उस पर पड़ी। जज ने दंपती से पूछा-क्या यह बच्ची आपकी है?

दंपती ने कहा-जी, हां। जज ने बच्ची को कॉपी लेकर बुलाया, और कहा-बेटा जरा कॉपी दिखाना। जैसे ही जज ने कॉपी देखी वो अवाक् रह गए। बच्ची ने एक पेज पर मम्मी और पापा का चित्र बनाया था। उन दोनों के बीच में खुद का चित्र बनाया। जज ने पूछा-बेटा, मम्मी और पापा काे अपने से दूर-दूर क्याें बनाया? तुमने उनका हाथ क्याें नहीं पकड़ा?

आरोप-प्रत्यारोपण के बीच पत्नी का कहना है था कि पति बाहर काम करने की वजह से प्रताड़ित करता है। शादी के बाद से ही पति ने बेहद रूखा रवैया अपना लिया था। यही वजह थी कि बच्ची के साथ बाहर रहना पड़ रहा है। जवाब में पति का कहना था कि पत्नी अपनी ही मनमर्ज़ी से चलती है। न तो घरवालों की, न ही उसकी सुनती है।

इस पर बच्ची ने जो जवाब दिया, उससे कोर्ट में मौजूद सभी लोग चौंक गए। बच्ची ने कहा, ‘मम्मी-पापा हमेशा लड़ते रहते हैं। मैं तो इनके साथ ही रहना चाहती हूं।’ इस पर जज ने बच्ची को पास बुलाकर उससे देर तक बातें की। जज ने कहा- बेटा, अब तुम जाे कहाेगी वही मम्मी-पापा करेंगे। बताया जा रहा है कि बच्ची ने जज से और भी बहुत बातें बताईं।

बच्ची की व्यथा, जज ने उसी की कॉपी में लिखी। मैं मम्मी और पापा से तब तक बात नहीं करूंगी, जब तक दाेनाें झगड़ना बंद नहीं करेंगे। दाेनाें जब तक झगड़ते रहेंगे, ताे वे मेरा हाथ कैसे पकड़ेंगे। मैं जाे भी बात कहूंगी, उसे जज अंकल लिखेंगे और दाेनाें इसे पढ़ें।

बच्ची ने आगे लिखा जब मम्मी मुझे बाहर भेजती है, उसके बाद मम्मी और पापा में लड़ाई हाेती है। उस समय मुझे अच्छा नहीं लगता। मेरी नानी के घर पर सब आकर रहें, ताकि नानी और दादी में दाेस्ती हाे जाए। मुझे नानी और दादी दाेनाें पसंद हैं। जब सब लाेग काम पर चले जाते हैं ताे दादी अकेले रहती है।

जज आशुतोष मिश्रा ने दंपती से कहा- कब तक पति-पत्नी बनकर झगड़ा करते रहोगे। साेचाे तुम्हारे ऐसे बर्ताव से बच्ची की मानसिकता पर क्या असर पड़ रहा है। उसे कैसा भविष्य दे रहे हाे। जब तक बच्ची पैदा नहीं हुई थी, तब तक पति और पत्नी थे।

बेटी के जन्म के बाद अपने ईगाे काे दरकिनार करके माता-पिता बन जाओ, उसकी भावनाओं के बारे में साेचाे। यही तुम दाेनाें की बाउंडिंग है, इसे मत ताेड़ाें, नहीं ताे बच्ची भावनात्मक रूप से बिखर जाएगी। बच्ची ने दाेनाें का फैसला कर दिया है, अब तुम्हें साेचना है क्या करना है। दंपती ने विचार के लिए वक्त मांगा है।

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