लॉकडाउन न टूटे, इसलिए मृत शैय्या पर लेटी मां से नहीं मिले पीएम

एम्स्टर्डम

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने दुनिया के सामने पेश की मिसाल

कोरोना संकट के बीच नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रुटे ने दुनिया के सभी नेताओं और लोगों के लिए ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी इन दिनों काफी चर्चा हो रही है। पीएम मार्क की मां काफी दिनों से बीमार थीं और डॉक्टरों ने कहा था कि उनका बचना संभव नहीं है, लेकिन देश में कोरोना संक्रमण के चलते लागू लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए मार्क अंतिम समय में भी मां से मिलने नहीं गए। लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद ही मार्क मां से मिलने पहुंचे, लेकिन उसी रात मां की मौत हो गई। पीएम मार्क का यह कदम उन लोगों के लिए एक उदाहरण है, जो भारत समेत कई देशों में लॉकडाउन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

असल में पीएम मार्क रुटे की 96 साल की मां एक केयर होम में रहती थीं और अंतिम सांसे गिन रही थीं। प्रधानमंत्री को इस बात की पूरी जानकारी थी। लेकिन खुद मार्क ने ही कोरोना संकट को देखते हुए दो महीने पहले किसी को भी ऐसी जगहों पर जाने पर पाबंदी लगाई थी, ताकि बुजुर्गों को संक्रमण के खतरे से बचाए रखा जा सके। इसी दौरान उनकी मां का भी निधन हो गया और उन्होंने प्रधानमंत्री होते हुए, अपनी सरकार के आदेशों का बहुत ही सहजता से पालन किया, भले ही इसका निजी तौर पर उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। नीदरलैंड प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि मार्क जिस रात बीमार मां से मिलने पहुंचे थे, उसी रात उनकी मृत्यु हो गई।

प्रवक्ता ने बताया कि वो काफी दिनों से बीमार थीं, लेकिन पीएम लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए उनसे मिलने नहीं गए। मार्क ने अपनी मां की मौत का खुलासा 25 मई यानी पिछले सोमवार को किया, जबकि उनकी बुजुर्ग मां पिछले 13 मई को ही दम तोड़ चुकी थीं। मार्क ने कहा कि उनकी मां का निधन कोरोना संक्रमण नहीं बल्कि लंबी बीमारी के बाद हुआ है।

ये बहुत दुखदायी, लेकिन कानून का पालन जरूरी

आखिरी दिनों में मां के साथ न रह पाने के चलते मार्क काफी दुखी हैं। हालांकि जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कानून सब पर बराबर लागू होते हैं, चाहे वो एक पीएम ही क्यों न हो। मार्क ने मां की मृत्यु की घोषणा करते हुए कहा कि इससे ज्यादा दुखदायी कुछ नहीं है कि मैं आखिरी पलों में उनके साथ नहीं रह पाया। बता दें कि नीदरलैंड में अब तक संक्रमण के 45,000 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं जबकि 5,800 से ज्यादा लोगों की इससे मौत हो गई है।

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