पाकिस्तान के ग्वादर में स्कूल का नाम तक चीनी भाषा में लिखा जा रहा

निखिल दवे/धरा पांडे

चीन द्वारा पाकिस्तान में भारी निवेश की खबरें अक्सर आती हैं। सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में चीनी कंपनियों के निवेश सिर्फ व्यापारिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भारत को घेरने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। सूत्रों के अनुसार अमेरिका के रक्षा विभाग के तहत काम करने वाली एनजीआईए (नेशनल जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस एजेंसी) ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ ये जानकारी साझा की है कि चीन द्वारा पाकिस्तान के बंदरगाह ग्वादर में लगभग 4300 करोड़ के निवेश की योजना है। बता दें कि ग्वादर से गुजरात समुद्र तट की दूरी 1000 किलोमीटर है। सामरिक दृष्टि से ग्वादर की स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ग्वादर में न सिर्फ बंदरगाह का निर्माण कर रहा है बल्कि इस पूरे क्षेत्र के विकास की भी जिम्मेदारी उसने ले रखी है। चीन के द्वारा यहां एक सेज मॉडल पर काम किया जा रहा है जहां 300 मेगावॉट के एक कोयला बिजली संयंत्र की भी स्थापना शामिल है। इसके अलावा बहुत से कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना और अस्पतालों के निर्माण में भी चीन की भूमिका है। चीन के दखल और निवेश की स्थिति यह है कि ग्वादर के प्राइमरी स्कूल पर भी पाकिस्तान के साथ चीन का झन्डा व चीनी भाषा में उसका नाम दिखाई देता है। 4300 एकड़ के ग्वादर क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की देखरेख चाइना एयरपोर्ट निर्माण कंपनी कर रही है।

भारत के इनकार करने पर पाक ने खरीदा था यह क्षेत्र

दरअसल, कभी ओमान का हिस्सा रहे ग्वादर को पाकिस्तान ने 1958 में ओमान से खरीदा था। बताया जाता है कि इससे पहले अमेरिकी एजेंसी ने यहां सर्वे कर इसे एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में चिन्हित किया था। भारत से अच्छे संबंधों के चलते ओमान ने ग्वादर को सौंपने की पेशकश की थी जिसे भारत ने दूरी का हवाला देकर नज़रअंदाज कर दिया था। तब पाकिस्तान ने इसे 8 दिसंबर 1958 को करीब 3 मिलियन डॉलर में खरीद लिया था। हांलाकि पाकिस्तान इसको ठीक तरीके से विकसित नहीं कर पाया। तब चीन आगे आया और उसने पाकिस्तान के साथ विकास के लिए करार किया।

 

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