जमानत पर आए व्यक्ति ने 8 घंटे तक 23 बच्चों की जान को खतरे में डाले रखा

विभव देव शुक्ला

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में एक ऐसी घटना हुई जिसमें 23 बच्चों की जान एक साथ खतरे में आ गई थी। इतने बच्चे लगातार 8 घंटे के लिए एक इंसान की गिरफ्त में फंसे हुए थे लेकिन तमाम कोशिशों के बाद वह बच्चे किसी तरह छुड़ाए गए। हैरानी वाली बात यह है कि घटना का मुख्य आरोपी हाल ही में जमानत से छूट कर आया था। आरोपी ने बेटी के जन्मदिन के बहाने बच्चों को अपने घर पर बुला कर बंधक बनाया।

जन्मदिन के बहाने बच्चों को बुलाया
सुभाष बाथम नाम के शक्स को अदालत ने हत्या के मामले में उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी, नतीजतन वह उम्र कैद की सज़ा काट रहा था। इतना ही नहीं, अपने गाँव के तमाम लोगों से उसके काफी विवाद भी थे। गुरुवार के दिन उसने अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने के बहाने से गाँव के लगभग 23 बच्चों को अपने घर पर बुला कर बंधक बना लिया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस भी पहुंची।
लेकिन थोड़ी ही देर में पुलिस समझ गई कि मामला बड़ा है और मौके पर कुछ भी हो सकता है इसलिए एटीएस की मदद ली गई। कई घंटों की मशक्कत के बावजूद सफलता नहीं हासिल हुई जिसके बाद एनएसजी कमांडो की एक टुकड़ी फर्रुखाबाद पहुंची। एक बजे रात पुलिस ने गाँव वालों से सहायता लेकर बाथम को पकड़ने की योजना बनाई। पुलिस बाथम के घर का ताला तोड़ कर भीतर दाखिल हुई, मौके पर मुठभेड़ हुई और अंत में आरोपी मारा गया।

पत्नी भी हुई घायल
मुठभेड़ के दौरान आरोपी की पत्नी बुरी तरह घायल हुई थी, पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मृत्यु हो गई। डीजीपी ओपी सिंह का कहना था कि पुलिस ने जब भीतर दाखिल होने की कोशिश की तब आरोपी ने पुलिस वाले पर गोली चलाई और जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। जवाबी कार्यवाई में आरोपी की मौत हो गई। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ऑपरेशन में शामिल टीम के हर सदस्य को 10 लाख रुपए देने का ऐलान किया है।

क्या था पुलिस पर गोली चलाने का मतलब
कार्यवाई के बाद आरोपी बाथम के घर की तलाशी भी ली गई और उस दौरान आरोपी के घर से राइफल, कारतूस, गोला-बारूद भी बरामद किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि इतने हथियार के साथ आरोपी 3 दिनों तक पुलिस का सामना कर सकता था। वह अंत तक रणनीति के हिसाब से ही चला, वह रुक-रुक कर गोली चला रहा था जिससे पुलिस उलझी रहे। गोली चलाने का मूल उद्देश्य लोगों में दहशत पैदा करना था।
उसने बच्चों को घर के निचले हिस्से में बंद करके रखा था, फिर वह अपने घर की छत पर चढ़ कर चिल्लाने लगा। उसने पुलिस वालों पर कुल 6 बार गोली चलाई जिसमें 2 पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे। एक बार पुलिस वालों ने आरोपी को दोस्त को भेजा कि वह बात करने की कोशिश करे लेकिन आरोपी ने उस पर भी गोली चला दी। इस दौरान एक बच्ची बेहोश भी हुई थी फिर आरोपी ने उसे छोड़ा था।

लेना था गाँव वालों से बदला
घटना का मुख्य आरोपी बाथम को अपने मौसा की हत्या के मामले में उम्र कैद हुई थी। इसके लिए वह दस साल कारावास में था और हाल ही में उसे उच्च न्यायालय ने जमानत भी दी थी। वह गाँव वालों से दुश्मनी रखता था क्योंकि उसका मानना था कि गाँव वालों ने उसे हत्या के मामले में फंसाया है। बच्चों को बंधक बनाने के पीछे उसका मूल उद्देश्य था गाँव वालों और पुलिस वलाओं से बदला लेना। लेकिन घटना में अंत में उसने खुद बदले बदले की भावना की कीमत चुकाई।

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