काबुल के मैटरनिटी हॉस्पिटल में हुए आतंकी हमले की तस्वीर आपकी आंखें नम कर देगी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मंगलवार को आतंकियों ने एक अस्पताल पर हमला कर दिया। इस घटना में 14 लोगों की मौत हो गई जिनमें दो नवजात बच्चे, अस्पताल में दाखिल महिलाएं और कुछ नर्स भी शामिल हैं।

ये अस्पताल काबुल के दाश्त-ए-बार्ची इलाके में था। इसे मेडिसिन्स सन्स फ्रन्टियर्स चलाता है। ये इंटरनेशनल एनजीओ है। जो ज्यादातर युद्धग्रस्त जगहों पर मेडिकल सेवाएं देता है।

पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने ट्वीट किया

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने काबुल के मैटरनिटी हॉस्पिटल में हुए आतंकी हमले की कड़ी आलोचना की है। हामिद करजई ने ट्वीट के जरिए अपना संदेश दिया है।

उन्होंने लिखा है, “मैं काबुल के मैटरनिटी हॉस्पिटल में आज हुए बम धमाके की कड़ी आलोचना करता हूं, जिसमें नवजात बच्चे, दूसरे बच्चे और महिलाएं मारी गईं। इस बर्बरता से साफ पता चलता है कि ये हमारे देश और हमारे लोगों के खिलाफ विदेशी साजिश का हिस्सा है। विदेश प्रेरित ऐसे हमलों से निकलने का एक ही तरीका है।”

140 से ज्यादा लोग अस्पताल में फंसे थे

एक डॉक्टर ने बताया कि हमले के समय 140 लोग बिल्डिंग के अंदर मौजूद थे। आंतरिक मामलों के मंत्रालय का कहना है कि काबुल के पश्चिम में अस्पताल पर हमले में तीन हमलावर शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि हमलावरों में से एक मारा गया है जबकि बाकियों से मुठभेड़ जारी है।

दूसरी ओर, तालिबान ने कहा है कि नांगरहर प्रांत में हुए हमले में उसका हाथ नहीं है। तालिबान ने एक ट्वीट में कहा है कि नांगरहर के खेवा जिले में शोक सभा पर हुए हमले में इस्लामिक एमिरेट की कोई भूमिका नहीं है। ट्वीट में कहा गया है कि इस्लामिक एमिरेट ऐसे हमले की घोर निंदा करता है।

हमले में आतंकियों ने जबरदस्त फायरिंग की और ग्रेनेड फेंके। इस हमले में 13 लोग मारे गए हैं। हमले में कई लोगों के घायल होने की भी खबर है। मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक मारे गए लोगों में एक सुरक्षाबल का जवान भी है। आंतकी हमले में कई डॉक्टरों के अंदर ही फंसे होने की जानकारी मिली है। अस्पताल के भीतर से गोलियां चलने की आवाजें आ रही थीं।

शांति समझौते की धज्जियां उड़ गई

29 फरवरी को अमेरिका और तालिबान के बीच ‘शांति समझौता’ हुआ था। इसे पूरा करने से पहले अमेरिका ने एक शर्त रखी थी। ये कि अगर तालिबान समझौता चाहता है, तो उसे हिंसा कम करने के प्रति गंभीरता दिखानी होगी। एक हफ़्ते का टाइमफ्रेम तय हुआ था। ये हफ़्ता 21 फरवरी से शुरू हुआ था। एक हफ्ते तक तालिबान ने कोई हमला नहीं किया, तो फिर समझौता हो गया।

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