छपाक की असल कहानी जिसमें नईम ने लक्ष्मी पर फेंका था तेजाब

विभव देव शुक्ला

दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक जल्द सुनहरे पर्दे पर उतरने वाली है। बहुत लंबे समय से लोगों को इस फिल्म का इंतज़ार था और अब लोगों का इंतज़ार खत्म होने वाला है। फिल्म की कहानी कुछ भी हो पर फिल्म की एक असल कहानी भी है जिसके बारे में कम ही लोगों ने सुना है कम ही लोग जानते हैं। उसी असल कहानी पर दीपिका पादुकोण की ‘छपाक’ तैयार की गई है।

2005 में हुई थी घटना
साल 1990 के जून महीने की पहली तारीख़ को दिल्ली के माध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी लक्ष्मी अग्रवाल। स्वभाव में सरल, तरीक़ों में चंचल और नज़रिये में साफ लक्ष्मी गायक बनने की ख़्वाहिश रखती थीं। लेकिन उनके इस सपने पर ज़ोरदार चोट हुई जब वह महज़ 15 साल की थी। 32 साल का एक युवक था नईम खान, जिसने लक्ष्मी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। लक्ष्मी ने बेहद कड़े शब्दों में नईम का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
नईम की कोशिशें रुकी नहीं, उसने लक्ष्मी का पीछा करना शुरू किया। लक्ष्मी का कई बार मना करना नईम को राज़ नहीं आया। अंत में साल 2005 में दिल्ली स्थित खान मार्केट में नईम ने लक्ष्मी पर तेजाब फेंक दिया। लक्ष्मी काफी देर तक वहीं पड़ी रही और कुछ समय बाद एक सार्वजनिक वाहन उसे सफदरगंज अस्पताल लेकर गया। लक्ष्मी को महीनों अस्पताल में गुज़ारने पड़े, कई सर्जरी भी हुई और लंबे समय तक इलाज चला। लेकिन लक्ष्मी का चेहरा इस घटना में बुरी तरह जल गया था।

16 साल की उम्र तक झेली हर मुश्किल
लक्ष्मी के अंदर खुद को ऐसी हालत में देखने की हिम्मत नहीं बची थी। लक्ष्मी ने आस-पास मौजूद हर शीशे को नकार दिया लेकिन जब पहली बार उसके चेहरे से सारी पट्टियाँ हटीं, वह नज़ारा लक्ष्मी के लिए बहुत मुश्किल था। एक समाचार समूह से बात करते हुए लक्ष्मी ने कहा था ‘उस समय ऐसा लगा जैसे मेरे पास कहने के लिए कोई चेहरा ही नहीं है।’ हालात ऐसे हो जाते थे कि लोग लक्ष्मी और उसके परिवार को बीमार कहते थे। 16 साल की उम्र तक लक्ष्मी ने ज़िंदगी के हर बुरे पहलू का सामना कर लिया था।

एसिड बिक्री पर लगवाई रोक
लेकिन लक्ष्मी ने इन हालातों का डट कर सामना करने का मन बनाया। लक्ष्मी ने साल 2006 में देश की सबसे बड़ी अदालत में एक याचिका दायर की। याचिका में लक्ष्मी ने लिखा कि एसिड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगे। जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2013 में एसिड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी।
तब से लेकर अब तक लक्ष्मी ने समाज के हर हिस्से में जागरूकता के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी। साल 2014 में लक्ष्मी को अमेरिका की पहली महिला मिशेल ओबामा से इन्टरनेशनल वुमेन ऑफ करेज का खिताब मिला। इस दौरान लक्ष्मी ने पूरे समाज में आम लोगों को बड़े पैमाने पर जागरूक करने का अभियान चलाया।

पीड़ितों को मिलते हैं अधिकार
इसके बाद आलोक दीक्षित और आशीष शुक्ला ने ‘स्टॉप एसिड अटैक’ नाम से अभियान शुरू किया। एसिड अटैक के तमाम मामले सामने आने के बाद इन लोगों ने छाँव फाउंडेशन शुरू किया, जिसके ज़रिये तमाम एसिड अटैक पीड़ितों की मदद भी की जाती है। इस समूह की मदद से अब कई एसिड अटैक पीडिताओं की वैधानिक तरीके से मदद की गई है। अब एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांग अधिकार विधेयक 2016 के ज़रिये तमाम अधिकार और लाभ दिए जाते हैं।

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