देश के दूसरे सबसे साफ शहर के स्कूली बच्चों ने खाद्य कंपनी को उनके प्लास्टिक पैकेट लौटाए

विभव देव शुक्ला

देश में हर साल स्वच्छ भारत सर्वेक्षण होता है, जिसके ज़रिये यह तय किया जाता है कि देश के शहरों में सफाई का स्तर क्या है? देश का कौन सा शहर सफाई के मामले में किस पायदान पर है? बीते वर्ष इस सूची में छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर दूसरे पायदान पर था। इस शहर के साथ यही नहीं बल्कि कई खास बातें हैं। जो देश के बाकी शहरों के लिए अच्छा भला उदाहरण पेश करती हैं कि एक शहर को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।

पढ़ने वाले बच्चों ने की पहल
इसी कड़ी में अंबिकापुर के एक विद्यालय में पढ़ने वाले कुछ बच्चों ने छोटी सी कोशिश की है। बच्चों ने अपने आस-पास के इलाकों से ऐसे रैपर उठाए जिनमें खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं। बच्चों ने खाने के प्लास्टिक पैकेट्स को इकट्ठा करने के बाद सीधे कंपनी में भेज दिया। साथ ही कंपनी से गुज़ारिश भी की, खाने का सामान प्लास्टिक रैपर या पैकेट में रख कर न बेचा जाए।
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए एक बच्चे ने कहा हमने ऐसा पिछले साल भी किया था लेकिन हमें बहुत अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। कंपनी ने हमारे प्रस्ताव पर बहुत गम्भीरता से विचार नहीं किया था। हम कंपनी को उनके फूड रैपर तब तक भेजते रहेंगे जब तक वह इसका उपयोग बंद नहीं कर देते हैं। सबसे पहले तो इससे शहर में गंदगी फैलती है और दूसरा प्रदूषण भी होता है। दोनों ही सूरतों में शहर के लोगों का नुकसान होता है इसलिए इसे रोकना होगा।

प्लास्टिक कूड़े के बदले खाना
इस तरह की कोशिशें अंबिकापुर में कोई नई बात नहीं हैं, हाल ही में यहाँ गार्बेज कैफे नाम से एक होटल शुरू हुआ। जैसा कि इस होटल के नाम से ही साफ है यहाँ पर प्लास्टिक कूड़ा देने के बदले नाश्ता और खाना मिलता है। अगर आप आधा किलो प्लास्टिक कूड़ा लेकर आते हैं तो उसके बदले में आपको नाश्ता मिलता है। वहीं एक किलो प्लास्टिक कूड़ा लेकर आने पर एक समय का पूरा खाना मिलता है।
अंबिकापुर नगर पालिका ने इस कैफे की शुरुआत भारत सरकार के स्वच्छ भारत सर्वेक्षण के तहत की थी। इस शहर की आबादी लगभग 2 लाख है जिसमें लगभग 100 से 150 परिवार गरीब वर्ग से आते हैं। सबसे पहले तो गार्बेज कैफे की मदद से ऐसे लोगों की मदद हो पाएगी जो गरीब हैं और दूसरा शहर की सफाई हो पाएगी। इन दोनों बातों के अलावा शहर के लोगों में सफाई को लेकर जागरूकता भी होगी।

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