उस ड्राइवर के परिवार की कहानी जिसे पालघर में सैकड़ों की भीड़ ने मार डाला

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

दो साधुओं की एक वीडियो बहुत वायरल हुई जिसमें वो भीड़ के हत्थे चढ़ गए और उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी। उनके साथ एक और शख्स था जो इस मॉब लीचिंग की भेंट चढ़ा वो उन साधुओं को ले जाने वाला ड्राइवर था। जब भी किसी की मृत्यु होती है तो सबसे ज्यादा इससे प्रभावित होने वाला उनका परिवार होता है, तब तो और जब वो एकलौता घर में कमाने वाला व्यक्ति हो।

साधुओं को ले जाने वाले ड्राइवर की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एक ओर इस पर राजनीति गर्मायी हुई है तो दूसरी ओर परिजन भी लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।

दरअसल नीलेश टेलघाड़े ही गाड़ी चलाकर 2 साधुओं को मुंबई से सूरत ले जा रहे थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से जब हाईवे पर पुलिस ने रोका तो पालघर के गांव के रास्ते निकलने लगे और वहीं दरिंदे भीड़े के हत्थे चढ़ गए। नीलेश की पत्नी की मानें तो 2 साधुओं के साथ दूसरे ड्राइवर को जाना था, लेकिन ऐन मौके पर मेडिकल इमरजेंसी की वजह से जब वो ड्राइवर नहीं गया तो उनके पति को जाना पड़ा।

मृतक ड्राइवर नीलेश तेलगड़े की उम्र 30 साल थी। वह दोनों साधुओं को लेकर कांदिवली से सूरत जा रहे थे, जहां उन्हें रामगिरी महाराज की अंत्येष्ठि में शामिल होना था। पालघर जिले के ग्रामीण विभाग में कुछ लोगों ने अफवाह के चलते तीनों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। यह घटना पुलिस के सामने हुई थी।

नीलेश भी बचपन से रामगिरी महाराज के अनुयायी थे और उनके दर्शनों के लिए अक्सर सूरत में उनके गांव जाते रहते थे। इसीलिए, साधुओं को ले जाने के साथ-साथ नीलेश खुद भी रामगिरी महाराज के अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते थे, लेकिन वो सूरत नहीं पहुंच पाए। महाराष्ट्र के पालघर में ही करीब 200 लोगों की एक भीड़ ने नीलेश और दोनों साधुओं- महाराज कल्पवृक्षगिरि और सुशीलगिरी महाराज की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

‘इंडिया टुडे’ से बात करते हुए नीलेश की पत्नी पूजा ने बताया, “मैं अपने पति का चेहरा भी नहीं देख पाई। उन लोगों ने बहुत बुरी तरह मेरे पति और दोनों साधुओं को पीट-पीटकर मार डाला। ऐसे लोगों को फांसी पर लटका देना चाहिए।”

नीलेश के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा उनकी मां और दो बच्चे हैं, जिनमें से एक की उम्र पांच साल और दूसरे की उम्र सात साल है। नीलेश अपने परिवार में कमाने वाला अकेला था।

उनकी मां निर्मला ने बताया कि वो पूरे परिवार का एकमात्र सहारा था। नीलेश की मां ने कहा, “जब से हमने उसकी मौत के बारे में सुना है, हम सदमे में हैं। अब हमारा क्या होगा? हम लोग कैसे जिएंगे, किसके सहारे अपना जीवन काटेंगे? कैसे हमारा गुजारा चलेगा? उसकी पत्नी और उसके बच्चे अब कहां जाएंगे? उसके बिना वो क्या करेंगे? हम पूरी तरह सदमे में हैं? मैं सरकार से अपील करती हूं कि और कुछ नहीं तो वो कम से कम हमें न्याय तो दिलाए।”

नीलेश की पत्नी ने अपने आंसू पोंछते हुए आगे सिसकते हुए बताती हैं, “मेरे पति का शव जब घर पहुंचा तो उनका चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था। हम लोग उनका चेहरा भी नहीं देख पाए। मैं सरकार से प्रार्थना करती हूं कि जिन लोगों ने मेरे पति की जान ली, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करें। उन लोगों को फांसी से कम कोई सजा नहीं मिलनी चाहिए।”

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों और 110 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें से 101 को 30 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है और नौ नाबालिगों को एक किशोर आश्रय गृह में भेज दिया गया है।



admin