कोरोना की पहली मरीज का इलाज करने वाली डॉक्टर ने सुनाई कहानी

बीजिंग

कोरोना संक्रमण दुनिया के ज्यादातर देशों तक पहुंच गया है और चीन के बाद इसने यूरोप और अमेरिका में भारी तबाही मचाई हुई है। इस वायरस के संक्रमण की शुरुआत वुहान के एक ‘वेट मार्केट’ से मानी जाती ही, हालांकि अमेरिका समेत कई देश इसके वुहान के लैब में बनाए जाने की थियरी का भी ज़िक्र करते रहे हैं। अमेरिका-चीन में जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच वो डॉक्टर सामने आई है जिसने कोरोना के पहले मरीज का कथित तौर पर इलाज किया था।

चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक कोरोना वायरस का पिछले साल दिसंबर में वुहान की एक वृद्ध महिला में सबसे पहले पता चला था। ये महिला इलाज के लिए सबसे पहले झांग जिक्शियान नाम की एक महिला डॉक्टर के पास गयीं थीं जहां उनका सीटी स्कैन किया गया था। चीन का दावा है कि यही वो पहली महिला डॉक्टर हैं जिन्होंने इस वायरस के बारे में पहली बार प्रशासन को चेतावनी दी थी। वुहान प्रशासन ने डॉक्टर के इस योगदान के लिए उनकी प्रशंसा भी की है। वुहान की सांस संबंधी डॉक्टर झांग ने कथित तौर पर कोरोना के इस पहले केस की कहानी सुनाते हुए बताया कि 26 दिसंबर को वुहान के आसपास के क्षेत्र से एक बुजुर्ग दंपत्ति हुबई प्राविंशियल हॉस्पिटल ऑफ इंटीग्रेटेड चाइनीज एवं वेस्टर्न मेडिसीन पहुंचा था। महिला की जांच हुई और यह वायरस सामने आया, हालांकि तब हम नहीं जानते थे कि ये इतनी बड़ी चुनौती साबित होगा।

अस्पताल की श्वांस एवं गंभीर देखभाल मेडिसिन विभाग की निदेशक झांग ने पहले मामले के बारे जानकारियां सामने रखते हुए कहा कि इस बुजुर्ग दंपत्ति को बुखार, खांसी और थकान जैसे लक्षण थे जो फ्लू या निमोनिया जैसा लग रहा था। सरकारी संवाद समिति के अनुसार जब अगले दिन 54 वर्षीय झांग के पास उनका सीटी स्कैन पहुंचा तब उन्हें फ्लू या सामान्य निमोनिया से अलग कुछ चीजें नज़र आईं। साल 2003 में फैली सार्स महामारी के दौरान वुहान में मेडिकल विशेषज्ञ के रूप में संदिग्ध मरीजों की जांच कर चुकीं झांग का वह अनुभव इस मौके पर काम आया और उन्हें महामारी के संकेत का आभास हुआ। उन्होंने बुजुर्ग दंपत्ति के सीटी स्कैन देखने के बाद उनके बेटे को बुलाया और उसे भी सीटी स्कैन कराने को कहा।

बेटा नहीं हो रह था सीटी स्कैन के लिए राजी

झांग ने बताया कि उनके पहले बेटे ने परीक्षण कराने से इनकार कर दिया। उससे कोई लक्षण या परेशानी नहीं थी और उसे लगा कि हम उससे पैसे ऐंठने का प्रयास कर रहे हैं।’ लेकिन झांग के दबाव में उसने परीक्षण कराया और दूसरा सबूत सामने आया, उसके बेटे के फेफड़ों में वही असामान्यता थी जो उसके माता-पिता में थी। झांग ने कहा, ‘ऐसा हो नहीं सकता कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों को एक ही समय एक ही बीमारी हो जाए तबतक वह संक्रामक रोग न हो।’ इसके बाद ठीक अगले दिन 27 दिसंबर को अस्पताल में एक और मरीज आया और उसे भी वही लक्षण थे। चारों के रक्त परीक्षण से वायरल संक्रमण का पता चल रहा था। झांग से उन्होंने इंफ्लुएंजा संबंधी कई परीक्षण कराये लेकिन उनके नतीजे में कुछ नहीं निकला। तब झांग ने अस्पताल को एक रिपोर्ट सौंपी और उसे जिला स्तरीय रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र को सौंपा गया। उन्होंने कहा, ‘रिपोर्ट यह थी कि हमने एक विषाणु रोग का पता लगाया और संभवत: वह संक्रामक है.’ तब झांग को तनिक भी मालूम नहीं था कि यह एक ऐसी महामारी की पहली रिपोर्टों में शामिल होगी जो पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद बहुत तेजी से फैली, उससे बहुत ज्यादा संक्रमण फैला और उस पर काबू पाना सबसे कठिन रहा।

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