इनकी अनदेखी और नासमझी से बढ़ते चले गए पॉजिटिव

संतोष शितोले | इंदौर

हद दर्जे की लापरवाही लगातार समझाइश के बाद भी कई लोग बीमारी की भयावहता को समझ नहीं रहे, उनकी मनमानी से मरीज बढ़ रहे हैं

शहर में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक 75 लोगों की पॉजिटिव रिपोर्ट, इंदौर में चार, उज्जैन में दो और खरगोन में एक सहित प्रदेश में सात मौतें हो चुकी हैं। प्रदेश में 98 पॉजिटिव में से 75 तो इंदौर में ही हैं, जिसे लेकर केंद्र ने रिपोर्ट मांगी है। खास बात यह कि अधिकांश पॉजिटिव की तो ट्रेवल हिस्ट्री ही नहीं मिली, लेकिन जो बात सामने आई वह यह कि इनमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने घोर लापरवाही बरती और शहर के लोगों को मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया। संक्रमित लोगों की अनदेखी, लापरवाही, गैरजिम्मेराना भूमिका और अड़ियल रवैये से कैसे फैला शहर में संक्रमण, इसे लेकर ‘प्रजातंत्र’ की रिपोर्ट-

80 रु. किलो के हुजूम से ऐसे फैलता रहा संक्रमण

पहला कारण चौंकाने वाला, लेकिन विश्वसनीय है। दरअसल, रानीपुरा, झंडा चौक, हाथीपाला, दौलतगंज व जवाहर मार्ग के पास मटन, चिकन, फिश की कई छोटी होटलें हैं। पिछले दिनों लॉकडाउन व कर्फ्यू के मद्देनजर इन संचालकों ने तैयार डिश आधी कीमत में बेचना शुरू कर दी, जिससे भीड़ बढ़ने लगी। बताया जाता है कि यहां पिछले दिनों उमराह को लेकर मुस्लिम समाज के कुछ लोग देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों में गए थे। शहर में कोरोना को लेकर जब कसावट हुई और लॉकडाउन की स्थिति बनने लगी तो यहां छोटे होटलों ने रेट कम कर भीड़ जुटा ली। संभवत: भीड़ में संक्रमित भी होंगे, जिनकी जांच नहीं हुई थी। उनसे अन्य लोग भी वायरस की चपेट में आते गए। इन लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं रखी।

अब घर नहीं, पूरा तंजीम नगर ही संक्रमण के घेरे में

खजराना क्षेत्र के तंजीम नगर में 13 लोग पॉजिटिव मिले। इनमें से कुछ को संक्रमण की जानकारी थी। बाद में दो को तकलीफ बढ़ी तो एमआरटीबी में भर्ती किया गया। जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो अस्पताल से भाग गए और तंजीम नगर में अपने घर पहुंचे, जहां तीन घंटे रुके। पुलिस की मदद से स्वास्थ्य टीम उन्हें ले गई। दो दिन पहले आई रिपोर्ट में 3, 5 और 8 साल के बच्चे भी संक्रमित हैं, जबकि बुधवार को तीन और पॉजिटिव पाए गए।

अस्पताल से ही घर आ गए और फिर भर्ती हो गए

स्नेह नगर में रहने वाला व्यक्ति दोस्त के साथ वैष्णोदेवी से लौटा। सर्दी-खांसी, बुखार रहा, फिर 28 मार्च को बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती किया तो दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बेड नहीं होने पर दोनों घर आ गए। तकलीफ बढ़ी और दोनों के सैम्पल लिए, जो पॉजिटिव मिले। अब अरबिंदो अस्पताल में हैं। उनके घर सील कर दिए गए। इस दौरान ये रिश्तेदारों व परिचितों के संपर्क में रहे, लेकिन उन्हें अब तक आइसोलेट नहीं किया गया।

संक्रमण को फैलाते रहे और स्वास्थ्य टीम को भगाया

रानीपुरा के संक्रमित लोगों का मुद्दा ज्वलंत है। यहां चार लोग कोरोना पॉजिटिव मिले, जबकि इससे लगे क्षेत्रों में भी इतने ही हैं। अव्वल तो इन लोगों ने खुद को आइसोलेट नहीं कराया था, जिससे संक्रमण बढ़ता गया। दूसरा, तीन दिन पहले जब डॉक्टरों की टीम मौके पर इन्हें ले जाने पहुंची तो लोगों ने बदसलूकी की, उन पर थूका और भगा दिया। यहां के कुछ लोग अभी आइसोलेट हैं, जिनकी रिपोर्ट नहीं आई है।

इनकी हठधर्मिता से संकट बरकरार

संक्रमित टाटपट्टी बाखल को एपिसेंटर घोषित किया गया है। बुधवार को यहां के संदेही संक्रमित लोगों को डॉक्टरों की टीम आइलोसेट के लिए ले जाने पहुंची तो टीम पर पथराव कर भगा दिया। बमुश्किल स्टाफ की जान बची और मामले की गूंज केंद्र शासन तक पहुंची। हंगामे के दौरान कई लोग एकजुट हो गए और आपाधापी मची। संभव है इससे संक्रमण और ज्यादा फैला।

परिजन ने बरती इलाज में कोताही

एक मामला 65 वर्षीय महिला का है, जिसकी गुरुवार सुबह मौत हो गई। बताया जाता है कि परिजन ने पहले महिला के इलाज के दौरान लापरवाही बरती। वे उपचार के दौरान ही उसे घर ले गए और तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया। शंका है कि उसके अन्य नजदीकी लोग भी वायरस की चपेट में हैं।

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