ईरान के इस पड़ोसी देश में अभी तक एक भी कोरोना का केस नहीं है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

मध्य एशिया के एक छोटे से देश तुर्कमेनिस्तान से खबरें हैं कि सरकारी विभागों ने ‘कोरोना वायरस’ शब्द का बहिष्कार कर दिया है। इसके अलावा, अगर कोई सार्वजनिक स्थानों पर इस बारे में चर्चा करता पाया जा रहा है, तो उसे गिरफ्तार किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस देश में मास्क लगाने पर भी बैन लगा दिया गया है। 

जहां बाकी देश लॉकडाउन की स्थिति से गुज़र रहा है वहीं तुर्कमेनिस्तान में आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर साइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है।

तुर्कमेनिस्तान की सरकार ने कथित तौर पर स्थानीय मीडिया या स्वास्थ्य सूचना ब्रोशर में भी  ‘कोरोना वायरस’ शब्द को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इंडिपेंडेंट न्यूज ने तुर्कमेनिस्तान क्रॉनिकल के हवाले से बताया है कि वायरल डिजीज के रोकथाम को लेकर सूचना वाले हेल्थ मिनिस्ट्री के ब्रॉशर में भी कोरोना वायरस का उल्लेख नहीं किया जा रहा है।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्ड्रस के प्रमुख जेने केवेलियर का कहना है कि कोरोना वायरस के उल्लेख पर प्रतिबंध तुर्केमेनिस्तान के लोगों को खतरे में डाल देगा।

तुर्कमेनिस्तान के संक्रमणमुक्त होने के दावे का सच जानना मुश्किल साबित हो रहा है क्योंकि यहां प्रेस की आज़ादी बहुत कम ​है। मीडिया पर कई तरह के दबाव एवं प्रतिबंध रहते हैं। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर यानी आरएसएफ ने 2019 के मीडिया स्वतंत्रता सर्वे में दुनिया के 180 देशों की सूची में तुर्कमेनिस्तान को आखिरी पायदान पर रखा था।

अब आप समझ सकते हैं कि यहां से सही और स्वतंत्र सूचनाएं मिलना मुश्किल है क्योंकि ज़्यादातर सरकार का नियंत्रण रहता है। दूसरी तरफ, यूरेशियानेट ने लिखा है, “तुर्कमेनिस्तान की व्यवस्था अब भी अस्वीकार करने के मूड में ही है।”

तुर्कमेन हेल्थकेयकर सिस्टम का अध्ययन करने वाले लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफेसर मार्टिन मैक्की ने कहा, ”तुर्केमेनिस्तान की ओर से आधिकारिक रूप से स्वास्थ्य के जो आँकड़े जारी किए जा रहे हैं उन पर बिल्कुल भरोसा नहीं किया जा सकता।”

राजधानी अश्गाबाट में रहने वाले एक शख़्स ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया, ”मेरी जान-पहचान का एक शख़्स सरकारी एजेंसी में काम करता है। उसने बताया कि मुझे इस बारे में बोलने से सख़्त मना किया गया है कि यहां वायरस फैला है या मैंने इसके बारे में सुना है, वरना मैं मुसीबत में आ सकता हूं।”

हालांकि तुर्कमेन प्रशासन लगातार इस संक्रामक बीमारी से बचाव की कोशिशों और संक्रमित लोगों की तलाश में जुटा है।देश में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के साथ मिलकर वो इससे निपटने के एक्शन प्लान पर भी चर्चा कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की रेसिडेंट को-ऑर्डिनेटर एलेना पनोवा ने बीबीसी को बताया कि इस प्लान में देशभर में को-ऑर्डिनेशन, रिस्क कम्युनिकेशन, मामलों की तहकीकात, लैब टेस्टिंग और दूसरे उपायों को लेकर चर्चा की जा रही है।

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