एक्सपायर दवा देने की शिकायत पर गर्भवती से बोले डॉक्टर कि एक्सपायरी जैसा कुछ नहीं होता

विनोद शर्मा | इंदौर

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) हॉस्पिटल लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। एक गर्भवती महिला को हॉस्पिटल ने पिछले साल एक्सपायर हो चुकी टेबलेट दे दी। टेबलेट मई में ही एक्सपायर हो गई है, ये शिकायत दो दिन बाद पति ने ड्यूटी डॉक्टर से की। इस पर डॉक्टर ने पति को डपटा और एक गोली पत्ते में से निकालकर खुद खा ली। फिर बोला- गोली भूसे के बनी होती है, एक महीने की देरी से क्या बिगड़ता है। जब पीड़ित ने बोला ये मई 2019 में एक्सपायर हुई है, तो डॉक्टर के होश उड़ गए। तत्काल बोले- स्टोर से बदल लो। सवाल ये है कि इस अस्पताल में ज्यादातर मरीज कम पढ़े आते हैं, उन्हें क्या अस्पताल इसी तरह दवा पकड़ा कर जान से खिलवाड़ करता है? दूसरी बात ये कि एक साल पुरानी दवाई अभी तक स्टोर में कैसे रखी हुई है।

स्कीम-114 निवासी दीपेंद्र राठौर पत्नी कविता को टिटनेस के टीके के लिए 1 जून को ईएसआईसी हॉस्पिटल गए थे। टीका लगा। जांच नहीं हुई। बाद में उन्हें तीन तरह की 15-15 टेबलेट दे दी गई। राठौर दंपति घर चले गए। शाम को जब कविता गोली खाने लगी, तब देखा तो तीन दवाओं में से एक मेथिकल टेबलेट की जो स्ट्रिप थी, उस पर मैन्युफैक्चरिंग दिसंबर 2017 लिखा था। दवा एक्सपायर हो चुकी थी मई 2019 में।

अन्य दवाएं भी खराब हालत में

राठौर ने बताया कि एक्सचेंज करके जो दवा दी गई है, वह भी नियर एक्सपायरी है। दवा थी नहीं, इसीलिए 15 की जगह सिर्फ 5 गोली दी गई है। इसके अलावा दूसरी दवाएं भी नियर एक्सपायरी हैं।

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