इन 28 महिलाओं ने माहवारी में कुछ ऐसा किया जिससे अगले जन्म में ‘कुतिया’ बनने का भ्रम टूट गया

विभव देव शुक्ला

माहवारी को लेकर हमारे समाज में अलग-अलग तरह की मानसिकता है। कहीं हमारे लिए उस मानसिकता को समझ पाना मुश्किल है तो कहीं मानसिकता को भरपूर सराहा जाता है। कहना गलत नहीं होगा कि गुज़रे कुछ सालों में माहवारी को लेकर हमारे समाज के नज़रिये में बड़े पैमाने पर बदलाव आया है। बदलावों का एक ऐसा ही नमूना देखने को मिला देश की राजधानी दिल्ली में जहाँ ‘पीरियड फेस्ट’ का आयोजन किया गया था।

पीरियड फेस्ट
पीरियड फेस्ट का नाम सुनते ही हमारे ज़ेहन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि पीरियड फेस्ट है क्या और इसमें हुआ क्या? राजधानी दिल्ली के मयूर विहार इलाके में ‘सच्ची सहेली’ नाम के गैर सरकारी संगठन ने पीरियड फेस्ट का आयोजन किया। इसमें लगभग 28 महिलाओं ने तमाम खाने के व्यंजन तैयार किए। इसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत लगभग 300 लोग शामिल हुए।

क्या है आयोजन के पीछे की वजह
इस आयोजन के पीछे वजह भी बेहद दिलचस्प है, दरअसल हाल ही में गुजरात के भुज में एक हैरान कर देने वाली घटना हुई थी। जिसमें एक महाविद्यालय में पढ़ने वाली 68 छात्राओं को अपने अंडरगारमेंट्स उतारने पड़ गए थे। भुज के स्वामी नारायण मंदिर के स्वामी कृष्णस्वरूप दास ने इस मुद्दे पर एक बयान भी दिया था और बयान काफी विवादित था।
उन्होंने बयान में कहा था, अगर आप एक ऐसी औरत के हाथ का बना खाना खाते हैं जिसकी माहवारी चल रही हो, तो आप अगले जन्म में बैल बनेंगे। अगर कोई महिला माहवारी के दौरान खाना बनाती है तो अगले जन्म में वह कुतिया बनेगी। इस बयान सहित पूरे मामले पर खूब विवाद हुआ था और सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हुई थी।

करनी पड़ी थी परेड
गुजरात के भुज में श्री शाहजानन्द गर्ल्स इंस्टीट्यूट है, जहाँ यह घटना हुई थी। महाविद्यालय के छात्रावास की संयोजक ने शिकायत की जिसके मुताबिक तमाम छात्राएँ जिनकी माहवारी चल रही थी वह रसोई में दाखिल हुईं। मंदिर के पास गईं और अपने साथ रहने वालों को छुआ जिसके बाद महाविद्यालय की प्राचार्या ने उन छात्राओं को बाथरूम में बुलाया गया। इतना ही नहीं उन्हें महाविद्यालय के भीतर परेड करनी पड़ी थी। इसके अलावा उनकी माहवारी नहीं चल रही है यह साबित करने के लिए उन्हें अपने अंडरगारमेंट्स तक उतारने पड़ गए थे।

क्या कहा था छात्राओं ने
एक समाचार समूह से बात करते हुए छात्रावास में रहने वाली एक छात्रा ने कहा ‘बुधवार के दिन हम पर तमाम आरोप लगाए गए और बेइज्ज़ती भी की गई। गुरुवार के दिन जब हम पढ़ने गए तब प्राध्यापक अंजलीबेन ने हमारी शिकायत प्राचार्य से कर दी थी। इसके बाद हमें क्लास से बाहर निकाल दिया गया और पंक्ति बना कर जाने के लिए कह दिया गया था।
वहीं 19 साल की शक्ति नाम की दूसरी छात्रा ने भी समाचार समूह से इस बारे में बात की। उसने कहा कि हम बहुत दूर के गाँवों से आते हैं, इसमें कक्षा 1 से लेकर 12 तक का विद्यालय भी चलता है। उनके लिए अलग से छात्रावास बनाया गया है लेकिन महाविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए कोई छात्रावास नहीं है।

स्वामी के बयान को सीधा जवाब
हमें विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं के साथ रहना पड़ता है। इसके बाद उसने कहा छात्रावास के संयोजक, ट्रस्टी और महाविद्यालय के प्राचार्य माहवारी के मुद्दे पर अक्सर हमें प्रताड़ित करते हैं। हमें माहवारी के लिए सज़ा भी दी जाती है, उन्होंने हमें अंडरगारमेंट्स उतारने के लिए कहा था। तमाम विवादों के बाद दिल्ली की इन 28 महिलाओं ने यह कदम उठाया है। कदम के ज़रिये स्वामी कृष्ण स्वरूपदास के बयान को सीधा जवाब भी दिया गया है। साथ ही साथ उन बच्चियों को भी संबल दिया गया है जिनके साथ ऐसी हरकत हुई थी।

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