बिहार और असम बाढ़ की ये तस्वीरें अभी भी मुख्य अखबार के फ्रंटपेज की हेडलाइन से बाहर है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

बाढ़ आने की खबरों का सिलसिला वापस से शुरू हो गया है। अब खबर है कि बिहार के बाद असम में बाढ़ ने लोगों से घर के साथ साथ अपनों को भी छीन लिया है। बिहार से लेकर असम तक भारी बारिश और बाढ़ के कारण हाहाकार मचा है।

नदियां उफान पर हैं और सैकड़ों गांव व शहर जलमग्न हो चुके हैं। जहां लोग अभी तक कोरोना जैसी महामारी से उबर नहीं पाए थे वहीं इस बाढ़ ने और ज्यादा मुश्किल खड़ी कर दी है।

फंसे हुए लोगों को राहत शिविर में पहुंचाया जा रहा है

लोगों को बाढ़ की तबाही से बचाने के लिए एनडीआरएफ की टीम तैनात की गई है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे हुए लोगों को राहत शिविर में पहुंचाया जा रहा है। लाखों लोगों को बाढ़ के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा है। इधर, बिहार प्रशासन का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं।

वहीं पूर्वोत्तर राज्य असम में बाढ़ की हालत लगातार बिगड़ रही है। बाढ़ के कारण अब तक 92 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 36 लाख से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं। ब्रह्मपुत्र सहित राज्य की आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राज्य के 33 में से 26 जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं।

एएसडीएमए ने बताया 3376 गांव पानी में डूबे हुए हैं

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने जोरहाट जिले के एक स्कूल में लगाए गए राहत शिविर का दौरा किया और लोगों से बात की .एएसडीएमए ने बताया कि 3376 गांव पानी में डूबे हुए हैं और 1,27,647.25 हेक्टेयर कृषि जमीन पर खड़ी फसल बर्बाद हो गयी।

काजीरंगा नेशनल पार्क में अब तक 66 जानवरों की मौत हुई है। बाढ़ की चपेट में आने से दो गैंडों की भी जान चली गई। बाघ, गैंडों समेत कई जानवर जान बचाने के लिए रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं।

बिहार में नदी किनारे बसे 3 दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं

बिहार के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और नेपाल से आ रही नदियों में उफान की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। नेपाल के तराई वाले इलाकों में भारी बारिश से फारबिसगंज, जोकीहाट, सिकटी और पलासी के भी निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है।

मधेपुरा में कोसी नदी का पानी आसपास के इलाकों में घुस गया है। ग्रामीण बाढ़ के बीच से किसी तरह खुद को बचाने में लगे हुए हैं। बिहार के गोपालगंज में गंडक नदी के किनारे बसे 3 दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। दर्जनों घर जलमग्न हैं। आने-जाने के लिए अब नाव का ही सहारा बचा है।

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