दोस्त के मज़ाक उड़ाने पर इस दिव्यांग व्यक्ति ने बनाई खुद की कैब

विभव देव शुक्ला

हमारे इर्द-गिर्द जज़्बे और जुनून की कहानियाँ कभी खत्म नहीं होती हैं। ऐसी कहानियाँ जो समाज के आम लोगों के एक बड़ी सीख या मिसाल से कम नहीं हैं। जिन कहानियों में लोग मुश्किल से मुश्किल हालातों का सामना करने के बावजूद हार नहीं मानते हैं और समाज के सामने नज़ीर पेश करते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है अहमदाबाद के दिव्यांग चालक मुकेश की, जिसमें जुनून भी है और जज़्बात भी।

5 साल की उम्र से मुश्किल हालात
अहमदाबाद के रहने वाले 34 साल के मुकेश गाड़ी चलाते हैं और उसके सहारे मुकेश का जीवनयापन होता है। मुकेश गाड़ी उस हालत में चलाते हैं जब उनके शरीर का निचला हिस्सा काम ही नहीं करता है। जब वह महज़ 5 साल के थे तब उनके शरीर का पूरा निचला हिस्सा पोलियो ग्रस्त हो गया था। कई बार सर्जरी भी हुई लेकिन फिर भी मुकेश की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
कुल मिला कर किस्मत ने मुकेश का साथ नहीं दिया। लोगों को इस बात का आश्चर्य होता है कि मुकेश कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा हैं। इसके पहले पहले वह लगभग 12 साल तक कई निजी कंपनी में काम कर चुके हैं। एक समाचार समूह से बात करते हुए मुकेश ने बताया कि तमाम निजी समूहों में उनके हालातों के चलते भेदभाव भी होता था। उनकी आय भी सीमित थी।

दोस्त ने बनाया था मज़ाक
एक बार उन्होंने अपने एक दोस्त से कैब कंपनी में नौकरी लगवाने के लिए कहा जिस पर मुकेश के दोस्त ने उनका मज़ाक बना दिया। यह बात मुकेश को बहुत बुरी लगी और तभी मुकेश ने ड्राइविंग करने का सोचा। मुकेश शुरू में मोडीफ़ाइड स्कूटर चलाते थे तभी उनके जेहन में मोडीफ़ाइड कैब चलाने का ख़याल आया। फिर उन्होंने बैंक से कर्ज़ लेकर कार ख़रीदी और उसे मोडीफ़ाइ करना शुरू किया।

अपने तरह के पहले ड्राइवर
मुकेश ने अपनी कार में क्लच से जुड़ा हुआ एक ऑटो गियर लगाया और पूरी तरह हाथ से चलने वाले ब्रेक भी बनाए। इतना कुछ करने के बाद उन्होंने एक कैब कंपनी में ड्राइवर की नौकरी के लिए आवेदन किया। मुकेश के मुताबिक कंपनी अच्छी है और वहाँ उनके साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं होता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत में अपने तरह के वह पहले ड्राइवर हैं।

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