इस दवा को कोरोना का रामबाण बताया जा रहा था लेकिन पहले ट्रायल में ही हुई फेल

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

एक दवा ने कुछ दिनों पहले लोगों में एक उम्मीद जगा दी थी शायद कोविड-19 से प्रभावित लोग कुछ हद तक इससे रिकवर हो सकते हैं। कुल मिलाकर इसे कोरोना की दवा बताई जा रही थी। लेकिन अब ये उम्मीद भी टूट गयी है परीक्षण में ये दवा भी फेल हो गयी है।

ये है वो दवा जिसे कोरोना का उपाय बताया गया

इस दवा का नाम रेमडेसिवीर है। दरअसल कोरोना वायरस की दवा को लेकर कई तरह के प्रयोग और परीक्षण जारी हैं। इसी के मद्देनजर पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मरीजों पर एंटीवायरल रेमडेसिवीर दवा का प्रयोग किया जा रहा था। अब ताजा रिपोर्ट की मानें तो यह दवा अपने पहले रेंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल में फेल हो गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्लिनिकल ट्रायल डेटाबेस पर रेमडेसिवीर दवा का ट्रायल असफल होने संबंधी विवरण छपने के बाद ही यह खबर तेजी से फैल गई। हालांकि इस पोस्ट को जल्द ही हटा लिया गया था। वहीं डब्ल्यूएचओ ने भी इस बात पुष्टि की है कि ड्राफ्ट रिपोर्ट गलती से अपलोड हो गई थी।

क्या है इस रिपोर्ट में

रिपोर्ट के मुताबिक ये ट्रायल 237 मरीजों पर किया गया जिनमें 158 मरीजों को रेमडेसिवीर दवा दी गई। 79 मरीजों को कंट्रोल ग्रुप में रखा गया। रेमडेसिवीर के साइड इफेक्ट्स के कारण 18 मरीजों को दी जाने वाली दवा जल्दी बंद कर देनी पड़ी। महीने भर बाद रेमडेसिवीर ले रहे 13.9 फीसद और कंट्रोल ग्रुप में रखे गए 12.8 फीसद लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं है।

न्यूज़ एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट मुताबिक़ डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर कुछ देर के लिए ड्राफ्ट का सार अपलोड किया गया था। इसकी ख़बर सबसे पहले ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ और ‘स्टैट’ ने एक स्क्रीनशॉट के साथ दी थी। लेकिन इस दवा को बनाने वाली कंपनी ने डब्ल्यूएचओ के डिलीट किए जा चुके पोस्ट में नतीजों को लेकर कहा है कि डेटा से ‘संभावित लाभ’ हुआ है।

दवा कंपनी ने और डब्लूएचओ का क्या रिएक्शन

रेमडेसिवयर ड्रग को लेकर काफ़ी उम्मीद थी। रेमडेसिवयर ड्रग से मरीज़ में कोई सुधार देखने को नहीं मिला। रेमडेसिवयर के बारे में डब्लूएचओ ने गुरुवार को अपने साइट पर रिपोर्ट दी और बताया कि ये कारगर साबित नहीं हुई।

जीलीड कंपनी ने डब्लूएचओ के इस पोस्ट को नकार दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें लगता है कि इस स्टडी को अनुचित तरीके से पोस्ट किया गया था।  यह सांख्यिकी रूप से सही नहीं था और इसे जल्द ही खारिज कर दिया गया था।

रेमडेसिवीर कैसे काम करता है

रेमडेसिवीर (जीएस-5734 ) न्यूक्लियोटाइड एनालॉग्स एक एंटीवायरल दवा है। यह गिलियड साइंसेज द्वारा विकसित किया गया था, और इबोलावायरस रोग और मारबर्ग वायरस के संक्रमण के ईलाज लिए सक्षम साबित हुआ था।

साल 2014 में इसे जीलीड नाम की अमेरिकी कंपनी ने इसे बनाया था। साथ ही मर्स और सार्स नाम की बीमारियों के इलाज में भी इसका इस्तेमाल हुआ था। मर्स और सार्स भी कोरोना वायरस परिवार से ही फैली बीमारियां हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि रेमडेसिवीर कोरोना वायरस को बढ़ने से रोकती है।

कोरोना वायरस मनुष्यों की कोशिका में घुसता है फिर वायरस RdRP नाम का एंजाइम छोड़ता है। इस एंजाइम की मदद से यह वायरस फैलता है। रेमडेसिवीर इस एंजाइम को रोक देती है, जिससे शरीर में वायरस की ग्रोथ रुक जाती है। यानी यह दवा शरीर में कोरोना के परिवार को फैलने से रोक देती है। 

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