विरोध के इस भीड़ में सीएए के समर्थन का ये शांतिपूर्ण तरीका वाक़ई अद्भुत है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। पूरा देश जहाँ सीएए, एनआरसी जैसे मुद्दे के विरोध को लेकर जल रहा है वहीं देश के एक हिस्से का तबका इसका जमकर सपोर्ट कर रहा है। इनके सपोर्ट का तथा शुक्रिया बोलने का तरीका काफ़ी अलग है।

जब पुरे देश के कुछ हिस्सों में संशोधित नागरिकता अधिनियम का विरोध हो रहा है ऐसे में कर्नाटक के कुछ लेखक, थिएटर आर्टिस्ट और पर्यावरणविदों के एक समूह ने इस नए कानून के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है।

बीते सोमवार को इसके समर्थन में इन लोगों ने राजाओं के जैसे कपड़े पहने और शिवमोग्गा जिले में उपायुक्त कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। उन्होंने एक्ट को देश में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया।

एएनआई से बात करते हुए एक अर्थशास्त्री बीएम कुमारा स्वामी ने कहा, “संसद द्वारा पारित सीएए एक एक्ट बन गया है और राज्य सरकार किसी भी अधिनियम को पारित नहीं कर सकती है जो इसके खिलाफ़ है।”

उन्होंने विपक्षी दलों पर लोगों को गुमराह करने का भी आरोप लगाते हुए कहा, “विपक्षी दल मुसलमानों को नागरिकता खोने के बारे में लोगों को गुमराह कर रहे हैं। सीएए अधिनियम केवल पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के बारे में है।”

उन्होंने कहा आगे कहा कि मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे इसका विरोध करने से पहले अधिनियम को समझें। देश को मजबूत बनाने के लिए हमें सीएए का समर्थन करना होगा और हम इस अधिनियम को लागू करने के साहस के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देते हैं।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम एक नया कानून है, जिसे दिसंबर 2019 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाया गया था। यह विधेयक पिछले साल संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद एक कानून बन गया। इस अधिनियम का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को एक फास्ट ट्रैक द्वारा भारतीय नागरिकता प्रदान करना है।

संसद में विधेयक के पारित होने के बाद से, देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। पूरे देश में लोग अधिनियम का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह देश में भेदभावपूर्ण है और धर्म के आधार पर पूर्वाग्रह पैदा करता है।

समय के साथ, विरोध प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में भी हिंसक हो गए, जिसके कारण भारत सरकार को स्थिति पर अंकुश लगाने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए इंटरनेट शटडाउन के लिए आदेश देना पड़ा है।

देश भर के शिक्षण संस्थानों के छात्र भी इस अधिनियम का विरोध कर रहे हैं। जहां हर तरफ़ इस तरह के विरोध देखने को मिल रहे हैं इस बीच में समर्थन का ये तरीका अपने आप में चकित करने वाला है।

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