नासिक से रवाना हुए इस स्पेशल ट्रक ने तिरूवनंतपुरम तक का सफर लगभग एक साल में पूरा किया है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

एयरोस्पेस प्रोडक्ट के निर्माण के लिए ऑटोक्लेव मशीन लेकर ये विशेष ट्रक अब जाकर महाराष्ट्र के नासिक से केरल के तिरुवनंतपुरम पहुंचा है।

पिछले साल 8 जुलाई को नासिक से सफर शुरू किया था

दरअसल इस पर विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के लिए स्पेस रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए 70 टन वजनी मशीनें लदी थीं। 74 पहियों वाला यह वॉल्वो ट्रक रविवार को तिरूवनंतपुरम पहुंचा। इस ऑटोक्लेव का इस्तेमाल अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े उपकरणों को बनाने में होता है।

इसके साथ पहुंचे कार्गो कर्मचारी ने एएनआई से बातचीत में कहा, ‘‘हमने पिछले साल 8 जुलाई को नासिक से सफर शुरू किया था। चार राज्यों से होते हुए केरल के तिरुवनंतपुरम के बीच 1700 किमी. की दूरी तय करने में हमें साल भर लग गए।’’

पेड़ काटे गए और बिजली के खंभों को भी हटाया गया

ट्रक में 32 स्टाफ के साथ ही पुलिस टीम भी इस मशीन को एस्कॉर्ट कर रही थी। इस खास ट्रक के लिए रास्ता बनाने के लिए कई जगहों पर गड्ढे वाली सड़कों की मरम्मत की गई। चौड़ाई के लिए पेड़ काटे गए और बिजली के खंभों को भी हटाया गया।

मशीन की लंबाई 7.5 मीटर और चौड़ाई 6.65 मीटर है। इस वजह से इसे जहाज से भेजना संभव नहीं था। यही वजह रही कि इसे महाराष्ट्र से केरल तक सड़क के रास्ते पहुंचाने का फैसला किया गया था।

भारी वजन लदे होने के कारण गाड़ी एक दिन में ज्यादा दूरी तय नहीं कर सकती थी। ऐसे में ट्रक पर मौजूद कर्मचारियों की टीम को इस बात का ध्यान रखना था कि इसकी वजह से कहीं भी ट्रैफिक जाम न हो।

ऑटोक्लेव का इस्तेमाल कई कार्यक्रमों के लिए होगा

विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के एक अधिकारी ने बताया कि इस मशीन को अलग-अलग नहीं किया जा सकता है। ऑटोक्लेव का इस्तेमाल कई कार्यक्रमों के लिए बड़े एयरोस्पेस प्रोडक्ट के निर्माण में होगा और उम्मीद है कि कुछ आवश्यक संशोधन के बाद इस महीने उसे शामिल कर लिया जाएगा।

मशीन को रस्सियों से बांधकर ट्रक पर रखा गया था। इसे खींचने के लिए गाड़ी के आगे और पीछे लगे दो एक्सल्स लगे थे। दोनों एक्सल्स में 32 पहिए लगे थे। एक्सल्स कुछ इस तरह लगाए गए थे कि मशीन का भार दोनों पर बंटा रहे और संतुलन बना रहे। इसके साथ ही 10 पहियों वाले एक पुलर को भी ट्रक से जोड़ गया था।

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