यह राज्य अपने स्टूडेंट्स का भरोसा हार गया, छात्र अब कर रहे प्रदर्शन

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

किसी भी देश, राज्य के बच्चे ही वहां के भविष्य होते हैं।कितनी भी भयानक परिस्थिति क्यों ना हो हम हर हाल में उनके अच्छे भविष्य के लिये तमाम तरह की कोशिश करते हैं। ये वक़्त भी किसी भयानक परिस्थिति से कम नहीं है। इस हालात में जहां इस देश, राज्य के बच्चे दूसरे देश, राज्य में पढ़ने गए थे उनको धीरे-धीरे वापस अपने घर लाया गया है केवल एक राज्य को छोड़कर।

इस राज्य का गैरजिम्मेदाराना हरकत

ये राज्य कोई और नहीं बिहार है। मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेस एग्जाम्स की कोचिंग कर रहे बिहार के करीब 11 हजार छात्र-छात्राएं लॉकडाउन की वजह से राजस्थान के कोटा में फंसे हुए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य सरकारें अपने राज्य के बच्चों को विशेष व्यवस्था करके घर पहुंचा चुकी है। बिहार के बच्चों द्वारा लगातार आग्रह करने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो इन लोगों ने गांधीवादी तरीका अपना लिया है। 

बिहार के करीब 11 हजार स्टूडेंट्स अभी कोटा में ही फंसे हुए हैं। बिहार सरकार द्वारा अभी तक उनकी सुध नहीं लेने से खफा वहां के स्टूडेंट्स ने गुरुवार को अनशन शुरू कर दिया है।

फंसे बिहार के छात्रों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वापस बुलाए जाने को लेकर प्रदर्शन और बिहार सरकार से गुहार लगाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बच्चे वहां फंसे हुए हैं लेकिन बिहार में उन्हीं बच्चों को लेकर राजनीतिक रोटी भी सेंकी जा रही है। कांग्रेस नेता राजेश सिंह राठौर का कहना है कि इस पर राज्य सरकार ही फैसला ले सकती है। वहीं, आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि बिहार सरकार बच्चों के लिए भी वीआईपी कल्चर अपना रही है।

बच्चों ने अपने ही सरकार को कहा गूंगा

इन स्टूडेंट्स ने अपने-अपने हॉस्टल में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बिहार के इन स्टूडेंट्स ने हाथों में पोस्टर लेकर नीतीश सरकार को अंधी, बहरी और गूंगी बताया। अनशन पर बैठे स्टूडेंट्स ने आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश सरकार विदेशों से तो स्टूडेंट्स को ला रही है, लेकिन उनकी सुध नहीं ली जा रही है। नीतीश सरकार की यह दोहरी नीति नहीं चलेगी। बिहार के इन स्टूडेंट्स ने चेतावनी दी कि अगर नीतीश सरकार ने उन्हें यहां से नहीं निकाला तो यह विरोध आगे भी जारी रहेगा।

बिहार के हजारों बच्चे हर साल मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा आते हैं। इस साल कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 24 मार्च को लॉकडाउन घोषित होने के बाद से ये बच्चे कोटा में ही फंसे हुए हैं। बच्चों के अलावा उनके परिजन भी लगातार राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें कोटा से वापस लाने की व्यवस्था की जाए। जब इस गुहार का राज्य सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा तो ये बच्चे अपने-अपने हॉस्टलों में तख्तियां लेकर उपवास पर बैठ गए हैं।

नीतीश का 15 साल वाला बिहार और नेताओं के सवाल

कांग्रेस नेता राजेश सिंह राठौर ने कहा कि विपक्ष का राज्य सरकार से आग्रह है कि बच्चों के भविष्य का ध्यान रखते हुए उन्हें सुरक्षित वापस लाने का कोई उपाय खोजे। कांग्रेसी नेता ने यह भी कहा कि 15 साल में नीतीश कुमार ने कैसा बिहार बनाया है 17 लाख बिहारी, बिहार के बाहर फंसे हुए हैं लेकिन सरकार कुछ नहीं कर पा रही।

इस बीच, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपील की है कि जिन राज्यों के विद्यार्थी अभी भी कोटा में फंसे हुए हैं, उन्हें उनकी सरकारें घर पहुंचाने में सहयोग करे। राजस्थान सरकार इसके लिए बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सरकार से बात कर रही है। इन राज्यों के हजारों बच्चे अभी भी देश की कोचिंग कैपिटल कोटा में फंसे हुए हैं। झारखंड के 3 हजार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के 2500-2500 हजार छात्र कोटा में मौजूद हैं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

कोटा में फंसे बिहार के छात्रों को वापस लाने के मामले में गुरुवार को एक याचिका पर पटना हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि 5 दिनों के अंदर इस मामले पर जवाब दें। अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। पटना निवासी पवन कुमार के वकील प्रकृति शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। राज्य के मुख्य सचिव को इस मामले में जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

admin