पश्चिम बंगाल का ये शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए पेड़ पर चढ़ जाता है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

देश में लॉकडाउन के बीच शैक्षिक संस्थाओं के कैंपस बंद हैं। पठन-पाठन के लिए भले ही सरकार ने ऑनलाइन तरीकों से शिक्षा के दावे किए हों, लेकिन फिर भी इंटरनेट कनेक्टिविटी और सुविधाओं के अभाव में अध्यापकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

ऐसा ही एक उदाहरण हाल ही में पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में भी देखने को मिला, जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त इंटरनेट कनेक्टिविटी मिले, इसके लिए एक शिक्षक ने पेड़ पर क्लासरूम बना कर रोज पढ़ाते हैं

इस शिक्षक का नाम सुब्रत पाती है। पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में दो शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाते हैं। सुब्रत हिस्ट्री के टीचर हैं। देश में जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो सुब्रत अपने गांव अहांदा में थे। घर में इंटरनेट की स्पीड ठीक नहीं रहती इसलिए वह पेड़ पर चढ़कर पढ़ाते हैं।

35 वर्षीय सुब्रत अब हर दिन सुबह घर के सामने नीम के पेड़ पर चढ जाते हैं। यहां उन्होंने लकड़ी का ढांचा भी तैयार कर लिया है। इस स्टैंड पर बैठकर वह अपने शिष्यों को इतिहास पढ़ाते हैं। सुब्रत कहते हैं, मैं अलग-अलग कक्षाएं लेता हूँ। सुबह 9:30 से शाम 6 बजे तक।  मैंने अपना अवास अस्थायी तौर पर कोलकाता से अपने गांव शिफ्ट कर लिया है। यह राज्य के जंगलमाला इलाके में है। 

सुब्रतो का कहना है कि वह हर रोज सुबह 9 से शाम 6 बजे के बीच कई क्लासेज को पढ़ाते हैं। उनके स्कूल के बच्चे अलग-अलग इलाकों से उनसे इंटनरेट के माध्यम से कनेक्ट होते हैं और इंटरनेट से ही पढ़ाने के बाद जरूरी स्टडी मटेरियल और होमवर्क उन्हें भेज दिया जाता है।

वह खाना और पानी के साथ पेड़ पर बनाए अपने प्लैटफॉर्म पर चले जाते हैं और हर दिन 2-3 क्लास लेते हैं। उन्होंने कहा- हमें अपने गाँव में हर जगह नेटवर्क सिग्नल नहीं मिलते हैं। 

हालांकि, पेड़ पर बैठने के कारण सुब्रत को गर्मी से परेशानी होती है। कई बार तो वे शौचालय भी नहीं जा पाते हैं। सुब्रत का कहना है, “मेरे क्लास में बच्चों की अटेंडेंस भी काफी अच्छी रहती है जिससे मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ता है। इसलिए मैं नहीं चाहता उनकी पढ़ाई में कोई बाधा आए।” कोरोना वायरस संकट के बीच सुब्रत जिस तरह से अपने जज्बे से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उसके लिए उनकी खूब तारीफ़ की जा रही है।

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