इस साल दुनिया में 25 लाख बेरोजगार और बढ़ जाएंगे

न्यूयार्क

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ)रिपोर्ट इस साल वैश्विक बेरोजगारी का आंकड़ा लगभग 2.5 मीलियन बढ़ने का अनुमान है। यही नहीं दुनियाभर में लगभग आधा अरब लोगों को पर्याप्त रूप से वैतनिक काम नहीं मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अंतररराष्ट्रीय श्रम संगठन की सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ये आधा अरब लोग जितने घंटे काम करना चाहते हैं उन्‍हें उतना काम नहीं मिल रहा है।

वर्ल्ड इंप्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलुक (वेसो) : ट्रेंड्स-2020 शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक बेरोजगारी बीते नौ वर्षों से स्थिर थी, लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक आर्थिक वृद्धि सुस्त हो रही है और कामगारों की संख्या में इजाफा हो रहा है, उस अनुपात में बाजार में नई नौकरियां नहीं पैदा हो रही हैं। यही नहीं इन कामगारों की लेबर मार्केट तक पहुंच भी नहीं हो पा रही है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती बेरोजगारी और गहरी होती असमानता की खाई के कारण लोगों को नौकरी या काम के जरिए बेहतर जीवनयापन करना मुश्किल हो गया है।

लोगों को उनके माफिक काम नहीं मिल रहा है। रिपोर्ट में दुनियाभर में 18.8 करोड़ लोगों को बेरोजगार माना गया है जबकि 16.5 करोड़ लोगों के पास पर्याप्त वैतनिक काम नहीं है। बेरोजगारी का आलम यह है कि दुनिया में 12 करोड़ लोगों ने काम ढूंढ़ना छोड़ ही दिया है।

पारिश्रमिक के लिहाज के लेबर मार्केट फीट नहीं

आईएलओ के महानिदेशक ग्‍ये रायडर ने यहां बताया कि दुनियाभर में आज भी अधिकांश लोगों के लिए जीविकोपार्जन का जरिया अभी भी श्रम बाजार हैं। दुनियाभर में वैतनिक कार्यों, उनके प्रकार और पारिश्रमिक के लिहाज से लेबर मार्केट फीट नहीं बैठ पा रहा है। मौजूदा वक्त में लेबर मार्केट का जो हाल है उसमें जीविकोपार्जन के जरिए बेहतर जीवन संभव नहीं है। आईएलओ रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों को कार्य संबंधी असमानताएं और नौकरियों से उनका निष्कासन बेहतर भविष्य की राह में रोड़ा बन रहे हैं।

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