जो अपने घरों से निकल रहे हैं उनको इन आदिवासियों से सीख लेनी चाहिए

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

कोरोना वायरस प्रकोप के दौरान हर कोई एक्सपेरिमेंट कर रहा है। कोई संसाधन तथा समय की अधिकता के कारण तो कोई मजबूरी में। लॉक डाउन का सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर तथा आदिवासियों पर देखा जा सकता है।

वहीं छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासी बस्ती वायरस से निपटने के लिए एक नया तरीका लेकर आए हैं। नया तरीका इसलिए क्योंकि उनके पास दैनिक आधार पर केमिस्ट की दुकानों तक पहुंच नहीं है। पहुंच नहीं होने के कारण उन्होंने अपने आप तथा समुदाय को सुरक्षित करने के लिए स्वयं के कदम उठाए हैं ।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिये गए 21 दिनों के लॉकडाउन के निर्देश का पालन करते हुए समुदाय की सुरक्षा के लिए ताड़ के पत्तों से मास्क बनाया है। कांकेर और बस्तर क्षेत्र के अन्य जिलों में जनजातीय बस्तियों ने अपनी सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लिया है और सरकार की मदद की प्रतीक्षा करने के बजाय, एहतियाती कदम उठाने में सक्रियता दिखा रहे हैं।

दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांकेर जिले के अंतागढ़ के कुछ गांवों में एक बैठक बुलाई गई थी, उस बैठक में ग्रामीण अपने ताड़ से बने मास्क पहनकर बैठक में शामिल हुए। भारिटोला गाँव के एक युवक ने मीडिया को कथित तौर पर कहा, “हमने कोरोना के बारे में सुना और हम डरे हुए थे। हमारे पास इससे खुद को सुरक्षित करने के लिए कोई सामान उप्लब्ध नहीं था, बस हम डरे थे। हमारे गाँवों में हमारे लिए कोई मास्क या सेनेटाइजर नहीं थे। इसलिए, हमारे गाँव के लोग सराय के पत्तों से बने मास्क पहन कर घरों में बंद हैं।”

छत्तीसगढ़ राज्य में COVID-19 के तीन सकारात्मक मामले सामने आए हैं। एक मामला राज्य की राजधानी रायपुर से और दूसरा राजनांदगांव जिले से सामने आया था।

पटेल मेघनाथ हिडको नाम के एक ग्रामीण ने मीडिया से कहा, “जब हमें कोरोनावायरस के बारे में जानकारी मिली, तो हमें पता था कि हमें अपनी जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि हम शहरों से बहुत दूर रह रहे हैं और हमें तत्काल मदद नहीं मिलेगी। क्योंकि माओवादी इलाके में रहना आसान नहीं है।”

रिपोर्टर अनुराग जो ब्रॉडकास्ट मीडिया के लिए काम करते हैं ने अपने ट्वीटर पर एक वीडियो ट्वीट किया है तथा वहां की स्थिति के बारे में बताया है, “आदिवासियों को हरे मास्क पहने देखना मेरे लिए पूरी तरह से एक नया अनुभव था। एक गांव के लोग मास्क का उपयोग कर रहे हैं। ये लोग दूसरे दिन पुराना मास्क नहीं दोहराते हैं। वे हर एक दिन एक नया बना मास्क पहनते हैं। इन मास्क के बारे में डॉक्टरों की तरफ से अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है, सिवाय इसके कि वे एक हद तक अपनी सुरक्षा कर रहे हैं। कोरोनवायरस के प्रकोप को मद्देनजर रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राजधानी रायपुर सहित राज्य के सभी 28 जिलों में हेल्पलाइन के साथ 24×7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं।”

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