जो लोग हाथ में तिरंगा लेकर विरोध कर रहे थे वही आज राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं-निर्भया की माँ

विभव देव शुक्ला

निर्भया दुष्कर्म मामले पर बयानबाजी और अटकलों का दौर पिछले कुछ दिनों से काफी बढ़ गया है। जैसे-जैसे मुख्य आरोपियों की फांसी की तारीख़ नज़दीक आ रही है वैसे-वैसे मुद्दा राजनीति की तरफ मुड़ रहा है। इस तरह के माहौल का सबसे बुरा असर पड़ रहा है निर्भया की माँ आशा देवी पर। समाचार एजेंसी एएनआई से इस मामले पर बात करते हुए उन्होंने कहा हमें मुश्किल हालात झेलने पड़ रहे हैं। हर कोई इतने संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकने में लगा हुआ है।

राजनीतिक रोटियाँ सेक रहे हैं
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए आशा देवी ने कहा, मैं कभी राजनीति की बात नहीं करती थी। सारी चीज़ों से दूर होकर, कानून से हाथ जोड़ कर अपना इंसाफ मांगा। लेकिन अब मैं ज़रूर कहना चाहूंगी कि जब 2012 में घटना हुई इन्हीं लोगों ने हाथ में तिरंगा लिया, काली पट्टी बांधी और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खूब रैलियां की और खूब नारे लगाए। आज यही लोग उस बच्ची की मौत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कोई कह रहा है ‘आप’ ने रोक दिया।

बहुत हुआ नारी पर वार
कोई कह रहा है हमें पुलिस दे दीजिये मैं दो दिन में दिखा दूँगा। इसलिए मैं ज़रूर कहना चाहूंगी कि अपने फायदे के लिए उसकी फांसी को रोके हुए हैं और हमें इस बीच मोहरा बनाया गया। इन दोनों जन के बीच मैं पिस रही हूँ। मैं खास तौर पर यही कहना चाहती हूँ प्रधानमंत्री जी से कि आपने 2014 में यह बोला था ‘बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार।’ मैं हाथ जोड़ कर आपसे कहना चाहूंगी कि जिस तरह आप दूसरी बार सरकार में आए हैं और जिस तरह आपने हज़ारों काम किए हैं।

आरोपियों को फांसी पर लटकाइए
उसी तरह इस कानून में भी संशोधन करिए। जैसे आपने सालों पहले कहा था ‘बहुत हुआ नारी पर वार अबकी बार मोदी सरकार’ तो एक बच्ची की मौत के साथ मज़ाक मत होने दीजिये। ऐसा लग रहा है जैसे हमें मोहरा बनाया जा रहा है।
तिरंगा उठा कर विरोध करने वाले लोग आज बच्ची की मौत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चारों आरोपियों को 22 तारीख़ को फांसी पर लटकाइए और समाज को दिखाइए कि हम देश के रखवाले हैं। हम महिलाओं को सुरक्षित रख सकते हैं, फिलहाल देश के लोगों को इस फैसले की सख्त ज़रूरत है।

फैसला राष्ट्रपति के पास अधिकार
सर्वोच्च न्यायालय में आरोपियों के बचाव के लिए एक याचिका दायर की गई थी जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपी मुकेश ने दूसरी याचिका दायर की जिसे केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया था। गृह मंत्रालय ने दया याचिका राष्ट्रपति को भेज दी है अब जल्द ही राष्ट्रपति मामले पर अंतिम फैसला सुना सकते हैं। यह पूरी तरह राष्ट्रपति पर निर्भर कर सकता है, धारा 72 के मुताबिक राष्ट्रपति के पास क्षमा करने का अधिकार होता है।

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