आजादी के बाद से ही यूपी में रह रहे हजारों सिख परिवारों को बेघर होने का डर

नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में बसे हजारों सिख परिवार इन दिनों वन विभाग के एक नोटिस से परेशान हैं, जिसमें उन्हें उन जगहों को खाली करने को कहा गया है जहां वे विभाजन के बाद से रह रहे हैं। इस मामले में पिछले दिनों कुछ सिख नेताओं के साथ इन सिख परिवारों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिला और मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी को भी उजाड़ा नहीं जाएगा लेकिन वन विभाग ने उसके बाद भी नोटिस भेजा है।

ये सिख परिवार लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, रामपुर, सीतापुर जिलों में बसे हुए हैं। इन्हें भारत विभाजन के बाद ही पाकिस्तान की अलग-अलग जगहों से लाकर यहां बसाया गया था। लखीमपुर खीरी जिले के रणपुर गांव में ऐसे करीब चार सौ सिख परिवार हैं और गांव की आबादी लगभग डेढ़ हजार है। पूरा गांव ही इन्हीं सिखों का है, जो पंजाब से विभाजन के वक्त यानी 1948 के आसपास यहां आकर बसे हैं। रणपुर गांव के ही बुजुर्ग जसवीर सिंह कहते हैं, “हम लोग जब आए तब यहां जंगल था। स्थानीय राजा ने यह पूरा गांव थोड़े बहुत पैसे लेकर हम लोगों को दे दिया। बाद में पंजाब से और लोग भी आए और यहीं बस गए। बिल्कुल जंगल का इलाका था जिसे हम लोगों ने खेती योग्य बनाया और तभी से यहां खेती कर रहे हैं। 1964 में सीलिंग के वक्त इस जमीन को सरकार ने ले लिया लेकिन हम लोगों को यहां से बेदखल नहीं किया गया और पहले की तरह ही हम खेती करते रहे।” जसवीर सिंह बताते हैं कि 1980 में चकबंदी के दौरान जमीन वहां के लोगों के नाम कर दी गई लेकिन खसरा-खतौनी में उनका नाम दर्ज नहीं हुआ।

25-30 लाख सिख लोगों पर होगा असर

इन गांवों में रहने वाले लोग कहते हैं कि इतने वर्षों में उन्हें न तो सरकारी तौर पर और न ही किसी अन्य तरीके से कभी हटाने का नोटिस दिया गया है। जसवीर सिंह कहते हैं कि लोग यही मानकर चल रहे हैं कि यह जमीन उनकी है, “इस तरह से करीब 25-30 लाख सिख लोग हैं। बिजनौर जिले के 15 से ज्यादा गांवों पर इस समय बेदखली की तलवार लटक रही है। इन गांवों में रहने वाले लोगों को बगैर किसी नोटिस और मुआवजे के ही बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। इस बारे में खबरें आने पर पंजाब में भी राजनीतिक हलचल मचने लगी। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आनन-फानन में एक उच्चस्तरीय बैठक बुला कर एक कमेटी का गठन किया है, जिसमें सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़, नरेश गुजराल और प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा को शामिल किया गया है। शिरोमणि अकाली दल पंजाब में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है। आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रमुख और सांसद भगवंत मान ने भी उत्तर प्रदेश में सिख किसानों को कथित तौर पर बेदखल करने का तीखा विरोध किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार में पंजाब के सभी मंत्री खुलकर इस प्रकरण पर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराएं।

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