एमआरटीबी से भागे कोरोना के तीन मरीज तीन घंटे बाद खजराना से पकड़े गए

कीर्ति राणा | इंदौर

यह खतरनाक बात है… अस्पताल से यूं भागकर घर जाना अपनों के लिए भी जानलेवा है

विश्वव्यापी महामारी कोरोना से निपटने के लिए जहां व्यापक स्तर पर प्रयास जारी है वहीं रविवार तड़के एक बड़ी घटना हो गई। एमआरटीबी अस्पताल में भर्ती कोरोना के तीन मरीज भाग निकले। इसकी सूचना जैसे ही स्टाफ को लगी तो स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस टीम हरकत में आ गई। रिस्पांस टीम के साथ पुलिस ने उन्हें ढूंढ़ना शुरू किया और तीन घंटे बाद खजराना क्षेत्र में दो को पकड़ लिया। इनमें से एक मरीज कोरोना पॉजिटिव है जबकि दूसरा नेगेटिव है। एक को भर्ती किया गया है, जबकि दूसरे मरीज को घर में ही आइसोलेट कर दिया है। वहीं तीसरे को उसकी मां ने पुलिस के सुपुर्द किया है।

45 वर्षीय युवक की पॉजिटिव रिपोर्ट आई थी, जबकि दूसरा मरीज तीन दिन से आइसोलेशन में था। सुबह जब दोनों नहीं दिखे तो डॉक्टर व नर्सें घबरा गई। पहले तो स्टाफ ने अस्पताल भवन व आसपास देखा और जब नहीं मिले तो सीनियर अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद रिस्पांस टीम (स्वास्थ व एसडीएम) के साथ पुलिस ने तलाशना शुरू किया। उनकी जानकारी निकाली तो पता चला कि उन्हें खजराना के तंजीम नगर में एक रिश्तेदार के यहां से लाकर आइसोलेट किया गया था। इस पर टीम वहां पहुंची तो वे वहीं मिल गए। टीम ने मौके से उनके एक रिश्तेदार को भी परीक्षण के लिए अस्पताल लाई।

एक और पॉजिटिव मरीज भागा, परिजन ने सौंपा

रविवार दोपहर एक बजे रानीपुरा निवासी 21 वर्षीय युवक कोरोना पॉजिटिव वार्ड से भाग गया। उसे 28 मार्च को भर्ती किया गया था। टेक्निकल बिंदुओं पर जांच कर क्राइम ब्रांच ने उसका पता लगाया, जिसके बाद पुलिस ने उसके परिवार को विश्वास दिलाया कि उसका बेहतर इलाज होगा और जल्द डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इस पर उसकी मां ने उसे पुलिस के समक्ष पेश किया। मौके पर ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को बुलाकर उसे सुपुर्द कर दिया गया।

आइसोलेशन रूम से घबराए

टीम को इन्हें तलाशने में तीन घंटे लगे। इस बीच ये कहां-कहां रहे इसे लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। दरअसल, टीम को यह यकीन था कि बस, ट्रेन, दुकान, रेस्टारेंट सभी बंद होने से या तो ये घर गए होंगे या रिश्तेदार के यहां। इस पर इनकी केस हिस्ट्री देखकर पता निकाला और सीधे तंजीम नगर पहुंची। दोनों का कहना है कि वे आइसोलेशन यूनिट के उपकरणों से घबरा गए थे। उनका कहना है कि वे अस्पताल से भागने के बाद रिश्तेदार के यहां पैदल गए थे। सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने बताया कि इनके रिश्तेदार के पूरे परिवार को क्वारंटाइन किया जा रहा है।

एमआरटीबी में शिफ्ट किए जा रहे हैं अन्य अस्पतालों में भर्ती कोरोना के मरीज

शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों को एमआरटीबी अस्पताल में शिफ्ट करने का काम चल रहा है। 450 बेड के अरबिंदो अस्पताल को भी अधिग्रहित करने का शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि अभी इस मामले में निर्णय नहीं हो पाया है। सहमति बनने की स्थिति में इस अस्पताल को कोरोना प्रभावित और संदिग्ध मरीजों के लिए आरक्षित किया जा सकता है।

अभी अरिहंत हॉस्पिटल में 2, बॉम्बे हॉस्पिटल में 4, एमआरटीबी में 8, सीएचएल, सुयश, शैल्बी, गोकुलदास और उज्जैन के माधव नगर अस्पताल में कोरोना प्रभावित 1-1 मरीज दाखिल है। इन सभी को एमआरटीबी में शिफ्ट करने की प्लानिंग के चलते अब अरबिंदो अस्पताल का प्रस्ताव मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाना है कि कहां शिफ्ट करें। मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. ज्योति बिंदल ने एमवायएच की नई ओपीडी में इन मरीजों के लिए ओपीडी भी इसी उद्देश्य से शिफ्ट कराई है कि सभी मरीज एमआरटीबी में शिफ्ट किए जाने पर बेहतर समन्वय रहे। स्वास्थ्य विभाग का यह निर्णय सभी मरीजों को एक ही स्थान पर उपचार के लिहाज से बेहतर कहा जा सकता है, लेकिन मेडिकल कॉलेज, एमवायएच स्टाफ इस निर्णय को चिकित्सा सेवा के लिहाज से अनुचित और निजी अस्पतालों को इस राष्ट्रीय आपदा से मुक्त करने वाला मान रहा है। वजह यह कि अभी जांच से लेकर उपचार तक में एमवायएच का स्टाफ ही जुटा हुआ है। यदि सारे मरीज एमआरटीबी में शिफ्ट कर दिए जाते हैं तो निजी अस्पताल सारी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज स्टाफ भी यदि संक्रमण का शिकार हो गया तो कोरोना के खिलाफ एमवायएच की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाएगी। चिकित्सा सेवा से जुड़े स्टाफ का मानना है कि जब सरकार ने राष्ट्रीय आपदा घोषित कर रखी है तो निजी अस्पताल सहयोग के दायित्व से कैसे बच सकते हैं। सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने कहा संक्रमित मरीजों को अन्य अस्पतालों से एमआरटीबी में शिफ्ट किया जा रहा है।

अरबिंदो अस्पताल प्रबंधन ने सरकार को कोरोना उपचार के लिए अस्पताल अधिग्रहित करने का प्रस्ताव दिया है। यदि शासन स्तर पर सहमति बन जाती है तो 450 बेड वाले अस्पताल को कोरोना पीड़ित मरीजों के लिए रिजर्व कर देंगे। अस्पताल का स्टाफ भी मिल जाएगा। ऐसा नहीं हो सका तो फिर एमआरटीबी में सभी मरीजों को शिफ्ट करेंगे।
-आकाश त्रिपाठी, संभागायुक्त

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