आज यानि 12 फरवरी से प्रारंभ हो गयी है गुप्‍त नवात्रि, माता की ऐसे होती है पूजा

आज यानि 12 फरवरी से प्रारंभ हो चुकी है गुप्‍त नवरात्रि (Gupt Navratri) धर्म के पथ पर प्रगतिशील साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) की अनुपम महिमा है।  गुप्त नवरात्रि में वैसे तो विषेश कामनाओं की सिद्धि की जाती है। इन नवरात्रियों में भी सात्विक और तांत्रिक दोनों ही प्रकार की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्र (Gupt Navratri) में संतान प्राप्ति से लेकर कर्ज मुक्ति करने के कई उपायों को भी किया जा सकता है। जिनके लाभ मिलने की संभावना भी काफी अधिक होती है। संपूर्ण वर्ष के दरमियान आती ‘शिवरात्रि’ साधक के लिए साधना में प्रवेश करने का काल है तो ‘नवरात्रि’ नवीनीकरण के अवसर की नौ रात्रियाँ हैं। यह नौ रात्रियाँ, प्रकृति की मनुष्य को वह भेंट है, जब मनुष्य अपने भीतर पैदा हो रही मलिनता को पहचान कर उसे हटाने का उद्यम करता है।

परिणाम स्वरूप मनुष्य के भीतर इन नव-रात्रियों में नव-निर्माण का आध्यात्मिक कार्य गतिशील होता है। वैदिक सूत्रम विज्ञान के अनुसार यह सृष्टि एक चक्रीय-धारा में चल रही है, किसी सीधी रेखा में नहीं। प्रकृति के द्वारा हर वस्तु का नवीनीकरण हो रहा है। हर रात्रि के बाद दिवस है तो दिवस के बाद रात्रि। हर पतझड़ के बाद बसंत आती है तो बसंत के बाद पतझड़ निश्चित है। यहाँ जन्म और मृत्यु भी चक्राकार में है और सुख के बाद दुःख तो दुःख के पश्चात् सुख भी निश्चित चल रहा है।

प्रकृति की स्थूल से सूक्ष्म तक की सभी रचनाएँ पुरातन से नवीन और नवीन से पुरातन के चक्रीय मार्ग का ही अनुसरण कर रही है। नवरात्रि भी मनुष्य के मन व बुद्धि को संसार की दौड़ में से लौट कर स्वयं में खोने का निश्चित सुअवसर है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri)  वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्रि काल आता है प्रथम गुप्त नवरात्रि माघ माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरम्भ होकर नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्रि काल रहता है और दूसरी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्रि काल की अवधि रहती है।

गुप्त नवरात्र (Gupt Navratr)  के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं। भगवान विष्णु शयन काल की अवधि के बीच होते हैं तब देव शक्तियां कमजोर होने लगती हैं। उस समय पृथ्वी पर रुद्र, वरुण, यम आदि का प्रकोप बढ़ने लगता है इन विपत्तियों से बचाव के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना की जाती है।

सामान्य और गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) अंतर
– सामान्य नवरात्रि में आमतौर पर सात्विक और तांत्रिक पूजा दोनों की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) में ज्यादातर तांत्रिक पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) में आमतौर पर ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं किया जाता, अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है। गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri)  में किसी विशेष पूजा और मन की मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होगी, सफलता उतनी ही ज्यादा ओर जल्दी मिलेगी।

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