शहर की सफ़ाई के खातिर जासूस बन गये थे आज के कलेक्टर

कीर्ति राणा | इंदौर

कोई आसानी से भरोसा नहीं करेगा लेकिन यह हकीकत है कि कलेक्टर मनीष सिंह ने कचरे का ढेर फेंकने वाले मुख्य आरोपी तक पहुंचने के लिए जासूस की तरह एक से दूसरी कड़ी जोड़ते हुए निगम की टीम के सहयोग से मुख्य आरोपी का पता लगाया था। जैसा कि होता रहता है आरोपी ने इस तरह के आरोप को झुठलाते हुए बार बार इंकार किया कि वह दोषी नहीं है लेकिन जब साक्ष्य दिखाए गए तो बोलती बंद हो गई। 50 हजार रु के भारी भरकम जुर्माने का असर यह हुआ कि लोगों ने सड़क पर कचरा फेंकने से तौबा कर ली।

भोपाल नगर निगम में करीब साढ़े पांच साल (फरवरी 06 से 2012) निगमायुक्त रहने के बाद मनीष सिंह इसी पद पर इंदौर नगर निगम में पदस्थ किए गए।स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर के नंबर वन रहने की शुरुआत उनके ही वक्त से हुई लेकिन इस पहले साल में कचरे के खिलाफ आमजन का मानस तैयार करने में सर्वाधिक मशक्कत भी करना पड़ी।शहर में तो घरों का सूखा-गीला कचरा निगम के वाहनों में डालने का पालन होने लगा था।एक दोपहर निगमायुक्त मनीष सिंह टीम के बाकी सदस्यों के साथ बायपास से गुजर रहे थे कि एक जगह सड़क पर कचरे का ढेर नजर आया। गाड़ी रुकवाई, साथ की गाड़ी से सफाई दारोगा-निरीक्षक आदि भी उतरे। उन सब से पूछा ये कचरे का ढेर कब से पड़ा है, अमला निरुत्तर क्योंकि उन्हें भी समझ नहीं आ रहा था।आसपास लगी भीड़ से भी पूछा, उसे भी कोई जानकारी नहीं थी। निगम अमले से मनीष सिंह ने कहा कचरे में सामान तलाशों, कोई ना कोई सुराग जरूर मिलेगा।निगम अमले ने ऐसा ही किया, टूटी चप्पल, तंबाकु के पॉउच, सिगरेट के टोटे, टीशू पेपर आदि के साथ ही शुगर, मिल्क पावडर के खाली पॉउच भी मिले और कचरा फेंकने वाले का सुराग भी मिल गया।ये सारा कचरा समीप ही स्थित द ग्रेंड भगवती होटल से फेंका गया था।

निगमायुक्त के निर्देश पर होटल पहुंचे निगम अमले ने होटल स्टॉफ से पूछताछ की तो साफ इंकार कर दिया।अंतत:होटल के महाप्रबंधक को स्पॉट पर आने के लिए कहा। पहले तो वह भी इंकार करते रहे लेकिन जब होटल के नाम वाले टीशू पेपर,शुगर-मिल्क पावडर के खाली पाउच आदि कचरा दिखाया तो होटल के जीएम निरुत्तर हो गए। मौके पर ही होटल के विरुद्ध 50 हजार का स्पॉटफाइन किया गया।इस कार्रवाई का नतीजा यह हुआ कि बड़े संस्थान, होटल आदि में भी निगम की सख्ती का आतंक पैदा हो गया।होटलों, मैरेज गार्डन आदि संचालकों ने भी गीला-सूखा कचरा अलग रखने का सख्ती से पालन शुरु कर दिया।इससे यह फायदा भी हुआ कि होटलों-मैरेज गार्डनों के आसपास वाली नालियां भी जूठन-डिस्पोजेबल कचरा आदि से चौक नहीं होने लगीं। सफाई के मामले में लगातार चौथी बार नंबर वन रहना भले ही लोगों को बाएं हाथ का खेल लग रहा हो लेकिन स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने के लिए अधिकारियों को खूब पापड़ बेलने पड़े हैं। कचरा निस्तारण में कथित ढिलाई को लेकर जिन विभागों को सुबह से शाम तक कोर्ट में खड़े रहना पड़ता था, वहीं से भी निगम-जिला प्रशासन की पीठ थपथपाई जाने लगी।

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