अर्द्धसैनिकों बलों में जल्द ही दम दिखाएंगे ट्रांसजेंडर्स

नई दिल्ली

केंद्र सरकार महिला और पुरुष के साथ ही अर्द्धसैनिक बलों में तीसरे जेंडर के रूप में ट्रांसजेंडर्स को भी शामिल करने पर विचार कर रही है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी, बीएसएफ, एसएसबी और सीआरपीएफ से विस्तृत सलाह मांगी है।

चर्चा है कि गृह मंत्रालय का यह ड्राफ्ट अमल में आ जाता है तो चीन से लगे बॉर्डर पर भारत के ट्रांसजेंडर ऑफिसरों की तैनाती की जाएगी। आईटीबीपी भारत और चीन के साथ सटी सीमा पर निगरानी का जिम्मा संभालती है। इसके साथ ही देश के पश्चिमी बॉर्डर पर पाकिस्तान की सेना के साथ भी ट्रांसजेंडर्स मुकाबला करेंगे। इतना ही नहीं देश के अंदरुनी हिस्सों में माओवाद के खिलाफ जंग में भी थर्ड जेंडर के सदस्य महत्वपूर्ण रोल निभाएंगे। गृह मंत्रालय ने इस मामले पर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय के अनुसार इस बाबत रिपोर्ट आने के बाद इनकी नियुक्ति प्रक्रिया में समुचित संशोधन किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि जन्म से शारीरिक तौर पर पूर्ण पुरुष या नारी न होने वाले व्यक्ति को उभयलिंगी या ट्रांसजेंडर या फिर थर्डजेंडर कहा जाता है। आईटीबीपी, बीएसएफ, एसएसबी और सीआरपीएफ गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले सुरक्षाबल हैं। देश के अहम रणनीतिक ठिकानों पर इनकी तैनाती की जाती है। इन बलों में थर्ड जेंडर के लोगों को शामिल करना उनके सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

सीएपीएफ के लिए ये एक अहम मोड़

सीएपीएफ के वरिष्ठ कमांडर ने बताया कि बलों ने अधिकारी रैंक में ट्रांसजेंडर लोगों के समक्ष आने वाली ‘चुनौतियों और अवसरों’ पर चर्चा की है। उन्होंने कहा, ‘शुरुआती विश्लेषण में हमने पाया है कि सीएपीएफ के लिए यह उसी तरह का एक अहम मोड़ है जब कुछ साल पहले कांस्टेबल और अन्य रैंक के अधिकारियों के तौर पर पहली बार महिलाओं की भर्ती हुई थी।’ उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर इन बलों की संरचना को समृद्ध करेंगे। इसके साथ ही, अगर एकीकृत बल उदाहरण पेश नहीं करेंगे तो हम कैसे उम्मीद करें कि समाज का अन्य धड़ा पुरानी धारणा को तोड़ेगा? आरंभिक चरण में सैनिकों के बीच स्वीकार्यता का मुद्दा हो सकता है, लेकिन महिलाओं ने जिस तरह कंधे से कंधा मिलाकर काम किया उसी तरह ट्रांसजेंडर भी करेंगे।

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