सऊदी अरब को ट्रंप ने दिया बड़ा झटका अब पैट्रियट मिसाइलों को हटाने की तैयारी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

ईरान के खिलाफ सऊदी अरब के साथ खड़े होने का दावा करने वाला अमेरिका ने अब रियाद को बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने फैसला किया है कि वह सऊदी अरब में तैनात ऐंटी-मिसाइल सिस्टम पैट्रियट को हटाएगा। 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पिछले महीने एक फोन कॉल पर ट्रंप ने सलमान को चेतावनी दी थी कि अगर सऊदी ने तेल का उत्पादन कम नहीं किया तो अमेरिका अपनी फोर्स हटाने पर मजबूर हो जाएगा। कोरोना वायरस महामारी की वजह से तेल की खपत कम हो चुका है और ग्लोबल इकॉनमी पर नकारात्मक असर पड़ा है।

इससे पहले अमरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने उन मीडिया रिपोर्ट्स की पुष्टि की थी जिनमें कहा गया था कि अमेरिका अपने ऐंटी-मिसाइल सिस्टम हटाएगा। हालांकि, माइक ने दावा किया था कि मिसाइलें हटाने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने सऊदी का समर्थन करना कम कर दिया है

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के किंग सलमान ने फोन पर बातचीत की और रक्षा के क्षेत्र में पार्टनरशिप का दावा किया। वाइट हाउस प्रवक्ता जुड डीर ने बताया कि दोनों नेताओं ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता की अहमियत पर चर्चा की और अमेरिका-सऊदी रक्षा सहयोग पर भी दृढ़ता दिखाई। 

बीते साल अमेरिका ने किया था सुरक्षा का वादा

वहीं बीते साल अमेरिका ने 200 सैन्य टुकड़ियां सऊदी अरब में भेजा था, इसका ऐलान अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने बीते साल किया था। सैन्य टुकड़ियां सऊदी अरब की सुरक्षा में पैट्रियट मिसाइलों के साथ तैनात होंगी क्योंकि सऊदी अरब के दो तेल प्रतिष्ठानों पर हमले के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत महसूस करते हुए यह कदम उठाया गया था।

पेंटागन के प्रवक्ता जोनाथन हॉफमैन ने कहा था कि इस तैनाती से किंगडम के संवेदनशील सैन्य एवं नागिरक संस्थानों की हवाई और मिसाइल सुरक्षा बढ़ेगी। रक्षा विभाग ने कहा कि तैनाती में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की एक बैटरी शामिल होगी, साथ ही एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले चार राडार तैनात होंगे।

जोनाथन हॉफमैन ने कहा था कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये कदम क्षेत्रीय भागीदारों और मिडल ईस्ट में सुरक्षा और स्थिरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बीते साल 14 सितंबर को सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के अबकैक और खुराइस स्थित तेल कुओं पर ड्रोन हमला हुआ था। इस हमले के लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया था।Attachments


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