सराफा के दो बंगाली कारीगर पॉजिटिव, तीन हजार में से 185 ढूंढे, 54 क्वारंटाइन

विनोद शर्मा | इंदौर

दो व्यापारियों की मौत के बाद सराफा में कार्रवाई

तब्लीगी जमातियों से फैली बीमारी के बाद हालात सुधारने में जुटे प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। सराफा बाजार में बंगाली कारीगरों में मिले पॉजिटिव मरीज चिंता का बड़ा कारण बन गए हैं। शुक्रवार को पॉजिटिव निकले सराफा के बंगाली कारीगर कई लोगों के संपर्क में आये हैं। शहर में 3000 से अधिक बंगाली कारीगर हैं जो सराफा और उससे लगे क्षेत्रों में रहते हैं।

पहली कार्रवाई में पुलिस ने शुक्रवार को ही 185 कारीगरों को कब्जे में लिया। इसमें से 54 को क्वारेंटाइन सेंटर भेजा गया है। एक-एक कमरों में जिस तरह 10 से 15 कारीगर रहते हैं उससे संक्रमित कारीगरों की संख्या और बढ़ने का अंदेशा है।

सराफा बाजार में सोने की कारीगरी में बड़े पैमाने पर बंगाली कारीगर काम करते हैं। इनकी संख्या 3 हजार से अधिक है और बीमारी फैलने का सबसे बड़ा खतरा भी यही संख्या है क्योंकि कारीगर न केवल समूहों में रह रहे हैं बल्कि अन्य लोगों से इनका मिलना जुलना भी जारी है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक कारीगर ऐसे हैं जो सराफा, बंबई बाजार, सिलावटपुरा, टाटपट्‌टी बाखल, बड़वाली चौकी, मोरसलीगली, जूना रिसाला, अहिल्यापुरा, पल्हरनगर, ओम विहार, 60 फीट रोड जैसी सघन बस्ती में ही रहते हैं।

क्वारंटाइन सेंटर से बंगाली कारीगर भागे भी हैं

शिकायतों के बाद कुछ कारीगरों को जिला प्रशासन ने क्वारंटाइन किया था। चार कारीगर कोरोना पॉज़िटिव मिले। बीते दिनों राजेंद्रनगर के किंग्स पार्क क्वारेंटाइन सेंटर से जो संदिग्ध भागे थे उनमें बंगाली कारीगर भी थे। अब तक 7 पकड़े जा चुके हैं। 1 फरार है।

छह अलग-अलग इमारतों से निकाले गए सभी कारीगर

शुक्रवार को सराफा पुलिस ने दिवाकर मार्केट से 40, वरुण बंगाली के 50, ओम सोनी के 20, शिरोमणि मार्केट से 20, देओरा मार्केट से 25 और सराफ़ा थाने के पीछे स्थित दीपक और रंजीत के कारख़ाने के 30 बंगाली कारीगरों को निकालकर क्वारंटाइन किया गया है।

बंबई बाजार से लेकर चंदन नगर तक घूमते रहे

वित्तीय रूप से इनकी मदद करते आ रहे एक शख्स ने बताया कि कारीगरों के गंदे रहन-सहन को देखकर मैंने उन्हें समझाया भी था कि दूर-दूर रहा करो। वह नहीं मानें। इनका आपस में मेलजोल जारी रहा। सराफा और मोरसलीगली की मल्टियों के अलावा यहां वरूण की तीन मंजिला बिल्डिंग में 8-10 कमरे हैं। जहां 100 कारीगर रहते हैं। मतलब हर कमरे में 10-15 लोग रहते हैं। 50 तो शुक्रवार को पुलिस की पकड़ में भी आए। यह लोग यहीं ज्वैलरी बनाते हैं। यहीं रहते हैं। मोरसली गली की एक बिल्डिंग के एक-एक कमरे से 14-15 लोग निकले हैं। बिल्डिंगों में इनकी बाथरूम कॉमन है। रात को छत पर सोते हैं। परमल लाकर उसमें पानी और मसाला छिड़ककर पेट भरते हैं, एक ही बर्तन से। कभी अधकच्चे चावल-आलू से खाते हैं। बंबई बाजार व चंदननगर के हॉटस्पॉट चिह्नित होने के बाद भी वहां अंडे की दुकानें चोरी-छिपे खुलती हैं जहां से यह अंडे लाकर शुक्रवार तक खाते रहे। इसके अलावा लॉकडाउन में भी वे अलग-अलग इलाकों में लोगों से मिलते-जुलते भी रहे। आसपास के क्षेत्रों में जो रिश्तेदार रहते हैं, मित्र रहते हैं उनके घर आते-जाते रहे।

सराफा पुलिस की बड़ी चूक….

सराफा थाना और बंगाली कारीगरों के ठेकेदारों के बीच अच्छी पहचान है। बावजूद इसके चंद कदमों की दूरी के बाद भी पुलिस ने कारीगरों को कमरों से बाहर नहीं निकाला। न यह जानने की कोशिश की कि यह लोग किस तरह से रह रहे हैं। हंगामा शुक्रवार को भी तब मचा, जब खबरें आम हो गई। इसके बाद भी कारीगरों की सूची नहीं बनाई।

टीआई ने कहा : घबराएं नहीं

सराफे के बंगाली कारीगरों की कहानी सामने आने के बाद सराफा थाना प्रभारी अमृता सोलंकी ने कहा कि किसी भी तरह की दहशत न फैलाई जाए। स्थिति पर पूरी नज़र है। जो भी आवश्यक है वह कार्रवाई की जाएगी। सीएसपी डी.के.तिवारी ने बताया कि 54 कारीगरों को क्वारेंटाइन कर दिया गया है।

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