भारत की दो दसवीं की छात्राओं ने एस्टरॉइड की खोज कर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को चौका दिया है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

लड़कियों का आनुपात भले ही लड़कों के मुकाबले एक पायदान कम हो लेकिन इन दिनों साक्षरता की बात करें तो शायद ये लड़कों से भी एक कदम आगे हैं।

अब लड़कियां भी स्पेस से लेकर के मैथमैटिकल, पॉलिटिक्स में अपने झंडे गाड़ रही हैं। कक्षा 10वीं की दो छात्रा ने धरती के समीप एक क्षुद्रग्रह की खोज की है।

वह बड़ी होकर एक एस्ट्रोनॉट बनना चाहती है

 

दरअसल यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के टेलीस्कोप से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण करके भारत की दो किशोर छात्राएं वैदेही वेकारिया और राधिका लखानी ने पृथ्वी की ओर आ रहे एक क्षुद्रग्रह (एस्टरॉइड) की खोज की है। एक भारतीय अंतरिक्ष शिक्षा संस्थान ने सोमवार को यह जानकारी दी।

सूरत की वैदेही ने कहा, ‘वे इस बात का इंतजार कर रही हैं कि कब उन्हें इस एस्टरॉइड के नामकरण का मौका मिलेगा। वह बड़ी होकर एक एस्ट्रोनॉट बनना चाहती है।’

हाल ही में एक विज्ञान कार्यक्रम उनके सीबीएसई स्कूल- पीपी सवानी चैतन्य विद्या संकुल में आयोजित किया गया था। दो महीने के लिए आयोजित किए गए इस प्रोग्राम में दोनों छात्राओं ने भी भाग लिया था।

एस्टरॉयड केे आकार पर अभी शोध हो रहा है

अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग और टेक्सास के हार्डिन सीमन्स विश्वविद्यालय के सहयोग से स्पेस इंडिया द्वारा इस कार्यक्रम को हाल ही में स्कूल परिसर में आयोजित किया गया था।

दोनों लड़कियों द्वारा खोज किये गए एस्टरॉयड केे आकार पर अभी शोध हो रहा है, लेकिन कम से कम अडाजण से तो बड़ा है। हालांकि पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन यदि टकराया तो पूरी मानव जाति पर खतरा होगा।

नासा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि फिलहाल यह मंगल की कक्षा में घूम रहा है। अगले आठ-दस बरस में यह पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करेगा।

निदेशक जे. पैट्रिक मिलर ने इस खोज की पुष्टि की है

 

स्पेस इंडिया की प्रवक्ता ने बताया कि वर्तमान में इस एस्टरॉइड को एचएलवी2514 के नाम से जाना जाता है। आधिकारिक तौर पर इसका नामकरण तभी किया जाएगा, जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा आधिकारिक तौर पर इसकी कक्षा की पुष्टि कर देगी।

नासा से संबद्ध सिटीजन साइंटिस्ट ग्रुप ‘इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलाबोरेशन’ (आइएएससी) के निदेशक जे. पैट्रिक मिलर ने इस खोज की पुष्टि की है।

सौरमंडल में करोड़ों की संख्या में क्षुद्र ग्रह घूम रहे हैं

पिछले दिनों स्पेस इंडिया की ओर से करवाए गए अखिल भारतीय क्षुद्रग्रह खोज अभियान में राजधानी के दो छात्रों (युगम पुरी और देवांश अग्रवाल) ने छह क्षुद्रग्रहों की प्रारंभिक खोज की थी। दोनों द्वारका सेक्टर-18 स्थित श्री वेंकटेश्वर इंटरनेशनल में कक्षा 10वीं के छात्र हैं।

इन क्षुद्रगृहों पर नासा रिसर्च करेगा। आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के खगोल वैज्ञानिक डॉ शशिभूषण पांडे के अनुसार हमारे सौरमंडल में करोड़ों की संख्या में क्षुद्र ग्रह घूम रहे हैं। दरअसल यह मंगल व बृहस्पति ग्रह के बीच की कक्षा में रहते हैं, लेकिन कभी कभार छिटककर पृथ्वी के करीब आ जाते हैं।

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