उप्र : विपक्ष के हंगामे के बीच बजट पारित, सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित

लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके पहले विपक्ष के भारी हंगामे के बीच योगी सरकार ने अपना बजट पारित करा लिया। विधानसभा सदन ने आज विनियोग विधेयक भी पारित कर दिया।

प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र 18 फरवरी से प्रारम्भ हुआ था। सदन की कार्यवाही दस मार्च तक चलनी थी, लेकिन इसे तय समय से पहले ही स्थगित कर दिया गया। इसकी वजह सत्ता पक्ष ने पंचायत चुनाव को बताया है। वहीं विपक्ष ने इसे लेकर सवाल भी उठाये हैं।

योगी सरकार ने गुरुवार को विपक्ष के हंगामे तथा बहिर्गमन के बीच वर्ष 2021-22 के बजट और विनियोग विधेयक समेत चार विधेयक को पारित करा लिया। योगी सरकार ने 22 फरवरी को सदन में 05 लाख 50 हजार 270 करोड़ 78 लाख रुपये का पेपरलेस बजट प्रस्तुत किया था। यह प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पेपरलेस बजट प्रस्तुत करने वाला देश का पहला राज्य बना है।

सरकार के मुताबिक वर्ष 2017-18 में पहला बजट किसानों को समर्पित था। वर्ष 2018-19 का दूसरा बजट औद्योगिक विकास तथा बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए था। वर्ष 2019-20 का बजट महिलाओं के सशक्तीकरण के माध्यम से समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन के लिए था। वर्ष 2020-21 का बजट युवाओं तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए समर्पित था। वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट का केन्द्र बिन्दु प्रदेश के समग्र एवं समावेशी विकास द्वारा प्रदेश के विभिन्न वर्गों का ‘स्वावलम्बन से सशक्तीकरण’ है।

नहीं हुआ प्रश्नकाल, विधायक निधि बहाल
विधानसभा में आज प्रश्नकाल नहीं हुआ। इसे स्थगित कर जब सरकार सभी विभागों का बजट पारित कराने लगी तो सपा, बसपा और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के विधायकों ने हंगामा करते हुए सदन का बहिर्गमन किया।

इस बीच संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने सदन को बताया कि विधायक निधि बहाल कर दी गई है। सभी विधायकों को अपने क्षेत्र में विकास के लिए विधायक निधि के तीन-तीन करोड़ मिलेंगे। इस दौरान उन्होंने विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों को पुरस्कृत करने की भी घोषणा की।

विपक्ष का सवाल
सदन की कार्यवाही को तय समय से पहले स्थगित किए जाने पर नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चैधरी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में जब तय किया था कि सदन 10 मार्च तक संचालित किया जाएगा तो सरकार क्यों पीछे भाग रही है ?

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन की दिन प्रतिदिन बैठकें कम होना लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है। ये हमारे सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों के अधिकारों में कटौती करने जैसा है। उन्होंने प्रश्नकाल नहीं होने देने के कारण भी संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना पर कटाक्ष किया और इस पर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि बजट पर चर्चा होनी चाहिए। हम लोग बजट जरूर पास कराएंगे, क्योंकि बजट उत्तर प्रदेश के विकास का हिस्सा है। विपक्ष नहीं चाहेगा कि बजट पास ना हो। लेकिन, सरकार को इसे पास कराने की इतनी जल्दी क्यों है। उन्होंने कहा कि यह सरकार लोकतंत्र और संविधान विरोधी है। ये सरकार संसदीय परम्पराओं को मिटाने वाली यह सरकार है। इसलिए हम इसका विरोध करते हैं।

बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में कोई व्यक्ति अकेले सब कुछ नहीं होता प्रतिनिधियों के माध्यम से जनता का जनता के लिए शासन होता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की नियमावली का हवाला देते हुए सदन को 10 मार्च तक जरूर चलाये जान की बात कही।

वहीं कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने भी नियमावली का हवाला देते हुए कहा कि कम से कम 24 दिनों तक अनुदान मांगों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहला सदन है, जिसमें सबसे ज्यादा नए सदस्य चुनकर आए हैं और विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष में ज्यादातर नये सदस्य हैं। हर सदस्य चाहता है और उसकी नैतिक जिम्मेदारी भी है कि वह सदन में आए और अपने क्षेत्र की बात को रखें। इसीलिए उसके क्षेत्र की जनता ने उसको चुनकर सदन में भेजा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा नियम और परम्पराओं की धज्जियां सदन में उड़ाई है। तय शेड्यूल के मुताबिक सरकार को चर्चा करानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि जब रामराज्य स्थापित है तो सरकार चर्चा करने से क्यों भागना चाहती है ?

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