छब्बीस विमानों के साथ पूर्वी समुद्र में उतरेगा विक्रांत

मनोज बिनवाल | इंदौर

हिन्द महासागर में नए खतरे से निपटने की तैयारी

चीन से सीमा विवाद के बीच भारत अपना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (आईइसी-1) को समुद्री परीक्षण के बाद हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी के बीच तैनात करेगा। कोच्चि मे इसका निमार्ण और हार्बर ट्रायल पूरे हो चुके हैं। सब कुछ ठीक रहा तो इसे 21 मई तक नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस एयरक्राफ्ट कैरियर में 26 फाइटर एयरक्राफ्ट और 10 हेलीकॉप्टर रखे जा सकते हैं। फिलहाल मल्टीरोल फाइटर मिग 29 इस पर तैनात किए जाएंगे।

इस एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए सुपर हार्नेट एफ 18 लड़ाकू विमान लाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। अमेरिका से आने वाले रोमियो हेलिकॉप्टर भी इसी पर तैनात होंगे। ये हेलिकॉप्टर पानी के भीतर सबमरीन को निशाना बनाते हैं। इस कैरियर पर बराक और ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात होंगी। आईएनएसविक्रांत (आईइसी-1) का नाम भारत के पहले विमान वाहक पोत #आईएनएसविक्रांत के ही नाम पर ही रखा गया है जिसने 71 के युद्ध में पाकिस्तान के बंदरगाहों पर कहर ढा दिया था। नौसेना के सूत्रों के मुताबिक आईएनएस विक्रांत को 21 जनवरी को नौसेना को सौंपा जाना था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण के कारण इसके अंतिम चरण का निमार्ण कार्य अटक गया था, इसे अब पूरा कर लिया गया है। अब सितंबर के पहले सप्ताह से आईएनएस विक्रांत का समुद्री परीक्षण आरंभ होगा।
इसके सारे सिस्टम्स का अंतिम परीक्षण कर नौसेना यह जांच करती है कि इसे उतारा जा सकता है या नहीं।

तीन कैरियर बैटल ग्रुप बनाने का बड़ा फैसला

भारतीय नौसेना ने लंबी समुद्री सीमा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए तीन कैरियर बैटल ग्रुप बनाने का फैसला किया है। इसमें एक ग्रुप बंगाल की खाड़ी (आईएनएस विराट), दूसरा अरब सागर (आईएनएस विक्रमादित्य) और तीसरा हिन्द महासागर (आईएनएस विशाल ) में तैनात करना चाहती है। एक कैरियर बैटल ग्रुप में एयरक्राफ्ट कैरियर में लड़ाकू विमानों के अलावा, सबमरीन, हमलावर जहाज के दस्ते, मिसाइल से हमला करने वाले विध्वंसकख, गश्ती और हमलावर
हेलीकॉप्टर होते हैं।

 

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