70 के दशक के बाद एक बार फिर हुई भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प, एक अफसर सहित 2 सैनिक शहीद

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

भारत और चीन के बीच पिछले काफी वक्त से लद्दाख में जारी विवाद अब और भी गहरा गया है। लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच एक बार फिर हिंसक झड़प हुई है। इस दौरान भारतीय सेना के एक अफसर और 2 सैनिक शहीद हो गए। यह झड़प सोमवार रात को गलवान घाटी में हुई है।

ये घटना तब हुई जब सोमवार रात को गलवान घाटी के पास जब दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद सबकुछ सामान्य होने की स्थिति आगे बढ़ रह थी। इस बड़े घटनाक्रम के बाद, दोनों सेनाओं के वरिष्‍ठ अधिकारी मौके पर मुलाकात कर हालात संभालने की कोशिश में लगे हुए हैं।

रक्षा मंत्री मीटिंग कर हालात सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं

समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की है। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए। दूसरी तरफ, चीन के विदेश मंत्रालय ने उलटे भारत पर बॉर्डर क्रॉस करने का आरोप लगाया है। चीन ने कहा है कि भारत ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे सीमा पर शांति भंग हो।

वहीं इस घटना के बाद चीनी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान सामने आया है। बीजिंग ने उलटे भारत पर घुसपैठ करने का आरोप लगाया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, बीजिंग का आरोप है कि भारतीय सैनिकों ने बॉर्डर क्रॉस करके चीनी सैनिकों पर हमला किया था। चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत ऐसी स्थिति में एकतरफा कार्रवाई ना करे।

आखिरी गोली 70 के दशक में चली थी

साल 1975 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब दोनों सेनाओं की बीच झड़प हुई है और उसमें जवान हताहत हुए हैं।

भारतीय सेना की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है, “गलवान घाटी में सोमवार की रात को डि-एस्केलेशन की प्रक्रिया के दौरान भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस दौरान भारतीय सेना के एक अफसर और दो जवान शहीद हो गए हैं। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी इस वक्त इस मामले को शांत करने के लिए बड़ी बैठक कर रहे हैं।”

मई महीने से शुरू हुआ था ये बवाल

भारत और चीन के बीच मई महीने की शुरुआत से ही लद्दाख बॉर्डर के पास तनावपूर्ण माहौल बना हुआ था। चीनी सैनिकों ने भारत द्वारा तय की गई लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल को पार कर लिया था और पेंगोंग झील, गलवान घाटी के पास आ गए थे। चीन की ओर से यहां पर करीब पांच हजार सैनिकों को तैनात किया गया था, इसके अलावा सैन्य सामान भी इकट्ठा किया गया था।

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