अमित शाह ने डॉक्टरों को ऐसा क्या कहा कि वो प्रोटेस्ट छोड़ काम पर लौट गए

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को डॉक्टरों के एक समूह तथा भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) के प्रतिनिधियों से बातचीत की और कोरोना वायरस के खिलाफ संघर्ष में उनके योगदान को सराहा। साथ ही शाह ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा भी दिया। 

गृह मंत्री के क्या समझाया

अमित शाह ने बुधवार को कहा कि कार्यस्थलों पर डॉक्टरों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सरकार उनके हितों के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने डाक्टरों से अपने प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को वापस लेने की अपील की जिसके तुरंत बाद आइएमए ने इसे वापस ले लिया।

अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्री ने साथ ही उनसे अपील की कि वे प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन भी ना करें क्योंकि सरकार डाक्टरों के साथ है।

बाद में शाह ने ट्वीट किया, ‘‘स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और मैंने वीडियो कॉंन्फ्रेंसिंग के जरिए डाक्टरों और आइएमए के प्रतिनिधियों से बातचीत की।’’

गृह मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डॉक्टरों और आईएमए के प्रतिनिधियों से बातचीत की। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

डॉक्टरों ने दी थी प्रदर्शन की चेतावनी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों पर हो रहे हमलों को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध-प्रदर्शन करने का एलान किया था। आईएमए ने कहा था कि सरकार को सुरक्षित कार्यस्थलों के लिए हमारी वैध जरूरतों को पूरा करना होगा। चिकित्साकर्मियों के साथ हो रही हिंसा तुरंत बंद होनी चाहिए।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने देश के लिए व्हाइट अलर्ट भी जारी किया था। आईएमए ने सभी डॉक्टरों और अस्पतालों से 22 अप्रैल को रात नौ बजे एक मोमबत्ती जलाकर अपना विरोध जाहिर करने के लिए कहा, साथ में केंद्र सरकार को काला दिवस मनाने की चेतावनी भी दी थी। 

आईएमए ने कहा था कि अगर सरकार व्हाइट अलर्ट के बाद भी डॉक्टरों और अस्पतालों के खिलाफ हिंसा पर केंद्रीय कानून लागू करने में विफल रहती है तो आईएमए 23 अप्रैल को काला दिवस घोषित करेगा। देश के सभी डॉक्टर काली पट्टी लगाकर काम करेंगे।

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