‘मस्जिद से बेहतर कोई जगह नहीं मरने के लिए’ बोलने वाले साद ने अपने नए ऑडियो में क्या कहा

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

तबलीगी जमात की हरकतों से आप बखूबी वाकिफ़ होंगे अब इस जमात के मुखिया मौलाना का नया ऑडियो आया है। इसमें वह जमात के लोगों से हुकूमत (सरकार) का साथ देने की अपील कर रहे हैं। ऑडियो में मोहम्मद साद कह रहे हैं कि हुकूमत का साथ दें और घर में ही रहें। इस बीच मोहम्मद साद की तलाश में दिल्ली से लेकर शामली तक छापे मारे जा रहे हैं। फिलहाल, मोहम्मद साद का अभी पता नहीं चल पाया है।

साद ने अपने जमात से क्या कहा इस बार

साद ने इस ऑडियो में कहा है, “इसमें कोई शक नहीं कि दुनियाभर में ये जो अजाब आया है हम इंसानों के गुनाहों का नतीजा है। इस वक्त यकीनी असबाब में जो आएं…..अपने घरों में रहते हुए दावत और तालीम का एहतराम करना है। ये अल्लाह के गुस्से को ठंडा करने का असल ज़रिया है। हुकूमत इंतज़ामिया का बराबर साथ देना है। मसलन, मज़मा जमा ना करना और इन हालात में हुकूमत की पूरी मदद करना ज़रूरी है। बंदा ख़ुद भी अपने आपको दिल्ली पुलिस की हिदायत पर ख़ुद को क्वारंटीन किए हुए है। जहां-जहां भी हमारी जमातें हैं, वो हुकूमत के कानून का पालन करें।”

तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद का यह ऑडियो दिल्ली मरकज के यूट्यूब पेज पर है। 

इस बीच देशभर को कोरोना संकट में डालने वाले तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद की तलाश जारी है। अब तक मौलाना का कोई पता नहीं चला है। दिल्ली में उसके दोनों घरों (निजामुद्दीन और जाकिर नगर) के अलावा उत्तर प्रदेश के शामली में छापेमारी की गई।

आखिर पूरा मामला क्या है?

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में लॉकडाउन के पहले तबलीगी जमात का मरकज लगा हुआ था। यहां देश-विदेश से 5 हजार से ज्यादा लोग आए थे। ज्यादातर लोग मरकज खत्म होने के बाद अपने-अपने घर चले गए लेकिन 2000 से ज्यादा लोग मस्जिद की बिल्डिंग में ही ठहरे हुए थे। देश में लॉकडाउन के ऐलान के बाद इस तरह लोगों का इकट्ठा होना अपराध है। दिल्ली पुलिस ने मुहम्मद साद समेत मरकज के 6 अन्य आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हालांकि मौलाना साद मौलान 28 मार्च से ही गायब बताए जा रहे हैं।

मस्जिद से बेहतर कोई जगह नहीं मरने के लिए

इससे पहले भी साद ने कई फालतू के बयान दिए हैं। उन्होंने अपने एक बयान में कहा था,”मस्जिद में आने से आदमी मरता भी है तो इससे बेहतर मरने की जगह कोई और नहीं हो सकती”

साद इस बारे में आगे कहते हैं, “ये खयाल बिलकुल बेकार खयाल है कि मस्जिद में जमा होने से बीमारी पैदा होगी। मैं कहता हूं कि अगर तुम्हें यह दिखे कि मस्जिद में आने से आदमी मर जाएगा तो इससे बेहतर मरने की जगह कोई और नहीं हो सकती। साहबान तमन्ना करते थे कि काश नमाज करते हुए मौत आए। इन्हें नमाज में खतरा नजर आ रहा है। अल्लाह बीमारी लाए हैं मस्जिदों को छोड़ने की वजह से। ये बीमारी हटा रहे हैं मस्जिदों को छोड़कर। सोचिए तो सही कितनी उल्टी सोच है। आदमी यह कहे कि मस्जिदों को बंद कर देना चाहिए, इनमें ताला लगा देना चाहिए, इससे बीमारी बढ़ेगी। इस खयाल को दिल से निकाल देना चाहिए।”

तबलीगी जमात का इतिहास

मौलाना साद का पूरा नाम मौलाना मुहम्मद साद कांधलावी है। मौलाना साद तबलीगी जमात के संस्थापक मुहम्मद इलियास कांधलावी के पड़पोते हैं। तबलीगी जमात भारतीय उपमहाद्वीप में सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन है। मौलाना साद के परदादा मौलाना इलियास कांधलावी ने 1927 में तब्लीगी जमात का गठन किया था। मौलाना इलियास उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला के रहने वाले थे और इसी वजह से वे अपने नाम के साथ कांधलावी लगाते थे। 

मौलाना साद, मौलाना इलियास के चौथी पीढ़ी से आते हैं। मौलाना साद का जन्म 1965 को दिल्ली में हुआ था। मौलाना साद की शुरुआती पढ़ाई मदरसा काशिफुल उलूम, हजरत निजामुद्दीन में हुई और इसके बाद उन्होंने सहारनपुर से आलमियत की डिग्री हासिल की। 1995 में तबलीगी जमात के सर्वेसर्वा मौलाना इनामुल हसन के निधन के बाद मौलाना साद ने खुद को संगठन का अमीर यानी सर्वेसर्वा घोषित किया और मरकज की जिम्मेदारी संभाली।

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