जब लंगर बाबा ने कहा एक रेहड़ी वाले को इतना बड़ा सम्मान दे दिया

विभव देव शुक्ला

फिलहाल केंद्र सरकार का एक कदम काफी सुर्खियों में है या यूं कहें केंद्र सरकार का ऐलान काफी चर्चा में है। हालांकि यह ऐलान हर साल होता है लेकिन इस बार के ऐलान में तमाम नाम ऐसे हैं जो सभी के लिए अलग और सोच से परे हैं। सरकार ने पद्म सम्मान के नामों का ऐलान किया है, जिसमें एक नाम ऐसा है जिन्हें खुद इस बात का इल्म नहीं था कि ऐसा कुछ होने वाला है। ऐसा ही एक नाम है चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहूजा जिन्हें आस-पास के लोग लंगर बाबा कह कर पुकारते हैं।

लंगर के लिए बेच दी संपत्ति
जब पुरस्कारों का ऐलान हुआ तब जगदीश जी लंगर लगाने में जुटे हुए थे। उन्हें कोई अंदाज़ा ही नहीं था कि उन्हें ऐसी कोई ख़बर मिलने वाली है। 85 साल के लंगर बाबा लगभग 35-40 सालों से चंडीगढ़ पीजीआई के सामने लंगर लगा रहे हैं, जहां हर इंसान मुफ्त में भोजन कर सकता है। जगदीश जी अपनी लगभग पूरी कमाई इस काम में लगा चुके हैं, लंगर जारी रखने के लिए वह अपनी करोड़ों की निजी संपत्ति तक बेच चुके हैं। एक बार तो उन्हें अपनी पत्नी के नाम की ज़मीन भी बेचनी पड़ी।

रोज़ दो हज़ार लोगों के लिए लंगर
चंडीगढ़ के सेक्टर 23 में रहने वाले जगदीश जी फिलहाल 85 साल के हैं। जैसे उन्हें पद्म पुरस्कार हासिल करने की जानकारी मिली वैसे ही उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उनकी ज़ुबान से निकला, ‘अरे एक रेहड़ी ललाने वाले को इतना बड़ा पुरस्कार दे दिया।’ वह हर रोज़ लगभग दो हज़ार से अधिक लोगों को लंगर में भोजन कराते हैं।
इतना ही नहीं जगदीश जी अक्सर गरीबों में कंबल भी बांटते हैं और ज़रूरत पड़ने पर लोगों की सहायता भी करते हैं। उनकी कमाई का लगभग पूरा हिस्सा लोगों को लंगर खिलाने में जा चुका है। उनका कहना है कि अब उनसे यह काम नहीं छूटने वाला है और ज़िन्दगी का इससे बेहतर रास्ता और क्या ही हो सकता है।

लावारिस लाशों के कर्ता-धर्ता
जगदीश लाल आहूजा के अलावा अयोध्या के मोहम्मद शरीफ, जयपुर के मुन्ना मास्टर, जम्मू कश्मीर के जावेद अहमद टाक और तुलसी गावड़ा को पद्म श्री मिला है। मोहम्मद शरीफ लगभग 25 सालों से लावारिस लाशों की अंतिम क्रिया करते हैं और अभी तक लगभग 5 हज़ार से अधिक लाशों की अंतिम क्रिया कर चुके हैं। इतना ही नहीं हर इंसान की अंतिम क्रिया उसकी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर करते हैं हिन्दुओं को मुखाग्नि देते हैं और मुस्लिमों को दफ़नाते हैं।

मुन्ना मास्टर और जावेद अहमद टाक
वहीं मुन्ना मास्टर उर्फ रमज़ान खान के नाम से बहुत से लोग पहले ही परिचित हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में जिन फिरोज़ खान की नियुक्ति को लेकर खूब विवाद हुआ था उनके पिता मास्टर साहब राम से लेकर कृष्ण और कृष्ण से लेकर गाय जैसे विशुद्ध धार्मिक पक्षों पर भजन गाते हैं। संस्कृत के कुशल जानकार हैं और कुछ समय पहले ही उनकी पुस्तक ‘श्याम सुंदरी वृन्दावन’ भी आई थी।
कश्मीर में आतंकियों की गोली से ज़िन्दगी भर के लिए दिव्यांग हुए जावेद अहमद टाक जम्मू कश्मीर के दिव्यांग बच्चों को पढ़ाते हैं। एक सामाचार समूह से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि शुरुआत में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के प्रति आम लोगों का नज़रिया देख कर गुस्सा आता था। ऐसा लगा कि नज़रिये को बदलने की ज़रूरत है और वह बिना खुद कोशिश किए सम्भव नहीं होगा।

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