जब सत्ता की नौटंकी चल रही थी, हम मीम बना रहे थे उसी बीच महाराष्ट्र में किसान आत्महत्या कर रहे थे

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। कोई भी अपने दिन की शुरुआत मौत की ख़बर लिखने या पढ़ने से शुरू करने से बचता है। मुझे भी नहीं पसंद यकीन मानिए मेरी उंगलियां ठंड से ज़्यादा आत्महत्या की ख़बर लिखते वक़्त कांपती हैं। पर ये ख़बर ऐसी है कि पढ़ने के बाद आप अपना माथा पकड़ लेंगे।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद नवंबर महीने में जब राज्य के नेता सत्ता में आने के लिए दिन-रात जोड़तोड़ में लगे हुए थे, उस समय बेमौसम वर्षा की मार से परेशान महाराष्ट्र के 300 किसानों ने आत्महत्या कर लिया। पिछले 4 सालों में एक महीने में किसानों के आत्महत्या की यह सबसे ज़्यादा तादाद है।

इससे पहले वर्ष 2015 में कई बार एक महीने में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा 300 पार कर गया था। प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों की आत्महत्या से बेपरवाह महाराष्ट्र के राजनेता जोड़तोड़ में व्यस्त रहे।

ख़बर के अनुसार, राज्य में अक्टूबर महीने में बेमौसम की भारी बारिश के बाद आत्महत्या की घटनाओं में काफी तेजी आई। इस बारिश में किसानों की 70% खरीफ़ की फसल नष्ट हो गई। अंतिम बार वर्ष 2015 में राज्य में किसानों की आत्महत्या का आँकड़ा 300 के पार पहुँचा था।

राजस्व विभाग के नवीनतम आँकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल अक्टूबर से नवंबर के बीच आत्महत्वर्ष 2019 में कुल 2,532 आत्महत्या के मामले आए जबकि वर्ष 2018 में यह आँकड़ा 2,518 था। अनुमान के मुताबिक़ बेमौसम की बारिश से राज्य के एक करोड़ किसान प्रभावित हुए जो स्वीडन की कुल जनसंख्या के बराबर है।

यह राज्य के कुल किसानों की संख्या का दो तिहाई है। इनमें से लगभग 44 लाख किसान मराठवाड़ा क्षेत्र के रहने वाले हैं। अब राज्य सरकार इन किसानों को मुआवज़ा दे रही है।

विदर्भ इलाके में काम करने वाले कार्यकर्ता विजय जवाधिया कहते हैं, “खेती में आने वाले खर्च और मजदूरी काफी बढ़ गई है, इस वजह से किसान एक खराब मौसम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। यही आत्महत्या की मुख्य वजह है। किसानों को उनके उत्पाद का और ज्यादा पैसा मिलना चाहिए। किसानी की अर्थव्यवस्था किसानों के खिलाफ झुकी हुई है।”

वहीं पिछले साल मराठवाड़ा इलाके में बहुत कम बारिश हुई थी। राज्य के सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र में नवंबर महीने में सबसे अधिक यानी 120 आत्महत्या के मामले और विदर्भ में 112 मामले दर्ज किए गए। वहीं, विदर्भ क्षेत्र से ही किसानों के आत्महत्या की सबसे अधिक ख़बरें आती रहती हैं।

किसानों की आत्महत्या में अचानक आई इस तेज़ी की वजह से जनवरी से नवंबर 2019 के बीच 11 महीने में आत्महत्या के मामलों में पिछले साल इसी अवधि के दौरान हुई घटनाओं से अधिक है।

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