जब नाटक में फाँसी का दृश्य ही नहीं था तब बच्चे ने क्यों लगाई फाँसी?

विभव देव शुक्ला

दुर्घटनाओं का मिजाज़ बहुत बुरा होता है और मिजाज़ से बुरा होता है नतीजा। इन दोनों के बाद दुर्घटना का सबसे बुरा हासिल है ‘असर’ क्योंकि दुर्घटना के मायने समझ वही पाते हैं जिनका उससे आमना-सामना होता है। मध्य प्रदेश के मंदसौर ज़िले में एक ऐसी दुर्घटना हुई जिसका नतीजा भयावह था। महज़ 12 साल का बच्चा जिसे एक नाटक में अंग्रेज़ सिपाही का किरदार निभाने का मौका मिला था। फांसी लगाने का नाटक करने के दौरान उसके साथ दुर्घटना हुई और उसकी मौत हो गई।

खटिया पर बिगड़ा था संतुलन
मामले के बारे में कुछ भी जानने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि आख़िर दुर्घटना हुई कैसे? 12 साल का प्रियान्शु मंदसौर के एक निजी विद्यालय में पढ़ता था, उसके विद्यालय में वार्षिकोत्सव होना था। जैसे आम तौर पर वार्षिकोत्सव में तमाम आयोजन होते हैं ठीक वैसे ही इसमें एक नाटक का मंचन होना था। नाटक शहीद भगत सिंह पर आधारित था जिसमें प्रियान्शु को अंग्रेज़ सिपाही का किरदार दिया गया था।
उसके पिता के कहने पर ही विद्यालय वालों ने प्रियान्शु को नाटक में शामिल किया था। रविवार के दिन वह भगत सिंह का किरदार निभाने की कोशिश कर रहा था, इसके लिए वह खेत में बने टपरे पर नाटक का वीडियो देख रहा था। दृश्य को प्रभावी तरीक़े से निभाने के लिए उसने नज़दीक पड़ी बल्ली में रस्सी डाली, फंदा बनाया और खटिया (खाट) पर चढ़ गया। खटिया का संतुलन बिगड़ा और वह फंदे पर झूल गया।

कम ही जाता था पढ़ने
थोड़ी ही दूरी पर उसके चाचा भी मौजूद थे लेकिन जब तक उनकी नज़र प्रियान्शु पर गई तब तक उसकी सांसें रुक चुकी थीं। पुलिस को मौके से मोबाइल मिला है जिसमें भगत सिंह पर आधारित नाटक का वीडियो मिला है। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रियान्शु अपने घर में सबसे बड़ा था और वह पढ़ने भी कम ही आता था। उसके पिता के ज़ोर देने पर प्रियान्शु को अंग्रेज़ सिपाही का किरदार दिया गया था। जबकि पूरे नाटक में फांसी का कोई दृश्य नहीं था फिर भी उसने ऐसा किया, ऐसे में सवाल यही बचता है कि उसके मन में यह विचार कैसे आया?

मन में फाँसी का खयाल कैसे
दुर्घटना का एक पहलू और है जिसके तहत वह मोबाइल में नाटक का वीडियो देख रहा था। भले नाटक का अभ्यास कितना भी अहम होता पर ऐसा करने के दौरान कोई उसके आस-पास नहीं था। बच्चे के हाथों में मोबाइल फोन भी था जिसमें नाटक चल रहा था, जिसे देख कर उसने ऐसा किया। विद्यालय वालों का यहाँ तक कहना है कि नाटक में फांसी का कोई दृश्य भी नहीं था इसके बावजूद बच्चे ने पता नहीं क्यों ऐसा किया। अंत में बस एक ही प्रश्न बचा रह जाता है कि उसके मन में फांसी का खयाल कैसे आया?

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