हमारी थाली से दूध और दाल लगातार कहाँ ग़ायब हो रहे हैं

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। जब थाली से धीरे-धीरे दाल से लेकर दूध की मात्रा घटते हुए गायब होने लगे तो ये चिंता का विषय है। भारतीय दाल और अनाज संघ ने एक रिपोर्ट ज़ारी किया है जिसके अनुसार पिछले कुछ समय में भारत में दालों की खपत घट रही है।

इस महीने पुणे में ग्लोबल पल्सेस कॉन्क्लेव हुआ। दाल का भव्य सम्मलेन, इसमें दुनियाभर के लोगों की एक ही चिंता थी कि हम पर्याप्त मात्रा में दालें क्यों नहीं खा रहे हैं? यहां पेश की गई रिपोर्ट में चना, मसूर, अरहर, मूंग की दालों के खुदरा बाज़ार और स्टॉक आंकड़े थे। इन सब आंकड़ों से ये बात निकलकर सामने आई है कि भारत में दाल और दूध अब लोग कम इस्तेमाल कर रहे हैं।

अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, पुणे में हुए वैश्विक दाल सम्मेलन के दौरान प्रत्येक दाल की ख़पत का आकलन लगाया गया था। इस आकलन में ये सामने आया है कि साल 2013-14 में दालों की खपत 18.6 मिलियन टन से बढ़कर 22.5 मिलियन टन हो गई थी। लेकिन 2018-19 में ये गिरकर 22.1 मिलियन टन पर सिमट गई।

एक चीज़ होती है चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) इसका मतलब होता है पिछले कई साल में किसी चीज में कितनी बढ़ोतरी हुई? अगर इस हिसाब से देखें, तो दूध के इस्तेमाल में पिछले पांच साल में 3.8 प्रतिशत की कमी आई है।

इस आकलन को लगाने के लिए हर साल के ओपनिंग स्टॉक को भारत में पैदा होने वाली और आयात की जाने वाली दाल की मात्रा से जोड़ा गया। इसके बाद निर्यात, बीज और चारे में लगने वाली दाल की मात्रा समेत क्लोज़िंग स्टॉक से घटाया गया। इस तरह जो आंकड़े सामने आए हैं वो बताते हैं कि भारत में दालों की खपत घट रही है। यही नहीं, दूध की खपत के मामले में भी यही संकेत मिल रहे हैं।

दाल और दूध का भारतीय थाली से लगातार कम होते जाना महंगाई की वजह से भी है। भारतीय बाज़ार में दालों के दाम में लगातार बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ी नहीं है।

प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी मानते हैं कि आमदनी में अपेक्षाकृत कम बढ़त की वजह से दूध और दालों की खपत में लगातार गिरावट सामने आ रही है। लेकिन इस गिरावट को आमदनी से तब तक नहीं जोड़ा जा सकता है जब तक सरकार एनएसएसओ के आंकड़ों को जारी नहीं करते।

आईपीजीए (भारत दलहन और अनाज संघ) भारत के दालों और अनाज उद्योग और व्यापार का सर्वोच्च निकाय है। इसका मुख्यालय मुंबई में है। दलहन उद्योग के विभिन्न क्षेत्रीय संघों सहित 270 से अधिक की सदस्यता के साथ कंपनी अधिनियम 2013 के तहत आईपीजीए पंजीकृत है। इसका उद्देश्य भारतीय दालों और अनाज उद्योग और व्यापार को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है जो बदले में भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा में मदद करेगा।

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