सरकारी रिपोर्ट से आखिर क्यों गायब हैं पॉजिटिव मौतें

विनोद शर्मा/संजय त्रिपाठी | इंदौर

बड़ा सवाल ? क्या जानबूझकर किया जा रहा है एमजीएम के मेडिकल बुलेटिन में घपला

इंदौर में कोरोना संक्रमण बढ़ने की एक वजह स्वास्थ्य अमला है। जो अस्पतालों में मरने वालों को हल्के में ले रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें अस्पतालों से मृतकों के शव परिवार को ऐसे ही सौंप दिए गए लेकिन बाद में उनकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हो गई। इसका बड़ा उदाहरण नेहरूनगर में हुई स्नेह धवन की मौत है। अंतिम संस्कार के दो दिन बाद आई रिपोर्ट में धवन के संक्रमित होने की पुुष्टि हुई।

नेहरूनगर में रहने वाले स्नेह धवन को 1 अप्रैल को गोकुलदास अस्पताल में भर्ती किया गया था। 3 अप्रेल को स्नेह की मौत हो गई। गोकुलदास अस्पताल की एम्बुलेंस आई। दो कर्मचारी स्नेह की शव दे गए। परिवार ने समझदारी दिखाई। शव को नहलाया नहीं। चार-छह रिश्तेदार जरूर आ गए थे। मालवा मिल मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हुआ। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 5 अप्रैल को जारी रिपोर्ट में धवन के संक्रमित होने की पुष्टी हुई लेकिन उसकी मौत की खबर नहीं दी गई। 6 अप्रैल को स्वास्थ विभाग का अमला नेहरूनगर पहुंचा और परिवार को उठाकर बायपास की एक होटल में क्वारेंटाइन कर दिया। 10 अप्रैल की सुबह स्वास्थ्य विभाग से स्नेह के पिता को सूचना दी गई कि वह तैयार रहे, उन्हें अरविंदों ले जाना है। शाम को ले गए। परिवार को लगा शायद पिताजी संक्रमित हैं लेकिन 10 और 11 अप्रैल को जारी रिपोर्ट में उनका नाम तक नहीं था।

नेहरूनगर के युवक की मौत, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से गायब

3 अप्रैल को मौत, 5 को संक्रमण की पुष्टी, 6 को परिवार क्वारेंटीन, 10 को पिता को अरविंदो ले गए, 12 अप्रैल तक उनका रिपोर्ट में नाम ही नहीं

जिसकी मौत हुई वह सबसे कम उम्र का

जिस स्नेह की मौत हुई है उसकी उम्र 30 साल है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार अब तक जितने भी लोगों की मृत्यु हुई है उनमें स्नेह सबसे कम उम्र का था।

मौत के आंकड़े ज्यादा है, कम बताए जा रहे हैं

दो दिन की रिपोर्ट में नाम या पता न आने पर परिवार ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। 26 मार्च को जब विशेष और गोकुलदास को संदिग्ध मरीजों के ईलाज के लिए अधिग्रहित किया गया था और सैंपल लिया जा चुका था तो फिर स्नेह का शव बिना लेमिनेशन के कैसे दे दिया? मौत की जानकारी किसी रिपोर्ट में नहीं। स्नेह जैसे जाने कितने मरीज हैं जिनकी मौत की खबरें छिपाकर प्रशासन मौत के झूठे आंकड़े प्रस्तुत कर रहा है।

चंद्रभागा के पॉजिटिव मरीज की मौत भी बुलेटिन से गायब

कोरोना रहे पॉजिटिव और मृत लोगों की जानकारी सरकार द्वारा नियमित जारी की जा रही है। हर संक्रमित शख्स और परिवार को आइसोलेट व क्वारेंटाइन का ध्यान रखा जा रहा है। कई लोग ऐसे हैं जिनकी मौत के बाद आई रिपोर्ट में पॉजिटिव की पुष्टि हुई है। इनके नाम भी फेहरिस्त में हैं लेकिन शहर में उक्त महामारी की चपेट में आए युवक का नाम सरकारी सूची में नहीं है। ऐसे मामलों ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला चंद्रभागा में रहने वाले दिव्येश दुबे (32) का है। 6 अप्रैल को सर्दी-खांसी के कारण उन्हें विशेष अस्पताल में भर्ती किया था। इस दौरान डॉक्टरों ने बताया था अगर उन्हें सामान्य सर्दी-खांसी है तो यहां रखा जाएगा लेकिन कफ या कोरोना जैसे लक्षण रहे तो एमआरटीबी में रैफर होना पड़ेगा। इस बीच अगले दिन उनकी मौत हो गई और परिजन व रिश्तेदारों ने उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया। 9 अप्रैल को एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने जो बुलेटिन जारी किया इसमें 34 पॉजिटिव लोगों की सूची में जिसमें दिव्येश दुबे का जिक्र (प्रोटोकॉल के तहत सिर्फ पते के अनुसार 102, चंद्रभागा जूनी इंदौर) किया गया है। हालांकि इसमें मौत का जिक्र नहीं है। इसका कारण है कि कई मरीजों की मौत के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट आई है। इसलिए समन्वय नहीं हो पाता।

बहरहाल, अब छह दिन हो गए हैं लेकिन न तो एमजीएम मेडिकल ने उनकी मौत की जानकारी सरकार से साझा की है बताया जाता है कि पिछले दिनों एक आदेश के तहत सभी निजी अस्पतालों में भर्ती कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को एमआरटीबी अस्पताल में एक स्थान पर भर्ती करने का आदेश दिया था लेकिन विशेष अस्पताल ने न तो रैफर किया और न ही इसके बाद किसी तरह की जानकारी एक-दूसरे से साझा की। इस बीच दिव्येश के परिजन व रिश्तेदार सकते में आ गए क्योंकि वे अंतिम संस्कार कर चुके थे। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके परिवार व रिश्तेदारों को 8 अप्रैल को शुभकारज गार्डन में क्वारेंटाइन के लिए ले गई जो आज भी वहीं हैं। इनमें मां की हालत खराब है जिन्हें बुखार है।

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