2015 के बाद लगातार हर साल क्यों बिल गेट्स ने दुनिया को तैयार रहने के लिए कहा

विभव देव शुक्ला

पूरी दुनिया फिलहाल कोरोना वायरस का सामना कर रही है। कहना गलत नहीं होगा कि दुनिया के सामने फिलहाल सबसे बड़ी समस्या कोरोना वायरस है। दुनिया भर में इस बीमारी से अब तक हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है और सबसे भयानक बात यह है कि हमारे देश में भी सैकड़ों लोग इस वायरस से प्रभावित हैं। लेकिन ऐसी बीमारियों की दस्तक और कद इतना छोटा नहीं होता, इनके पीछे अच्छी भली वजह और पृष्ठभूमि होती है।

वजहों का पता भले काफी समय बाद लगे और कुछ ही लोगों को लगे लेकिन ऐसी बीमारियों का अंदेशा ज़रूर हो जाता है। दुनिया में ऐसे तमाम लोग हैं जो भविष्यवाणी भले नहीं करते लेकिन दूरदर्शी ज़रूर होते हैं, जिन्हें आने वाले भयानक नतीजों का अंदेशा पहले ही हो जाता है। ऐसा ही अनुमान लगाया था दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल बिल गेट्स ने।

साल 2015
कनाडा में एक शहर है वैनकोवर, वहाँ साल 2015 में एक टेड टॉक हुई थी। टेड टॉक का शीर्षक था “The Next Outbreak? We’re Not Ready.” उस दौरान दुनिया इबोला वायरस का सामना कर रही थी, लिहाज़ा उस टेड टॉक में इबोला पर बात हुई थी। लेकिन बिल गेट्स का नज़रिया बाकियों से हट कर था, जहाँ सब इबोला पर बात कर रहे थे वहाँ उन्होंने इससे कुछ कदम आगे बढ़ कर बात की।

एक करोड़ लोगों की मौत
टेड टॉक में बात करते हुए बिल गेट्स ने कहा ‘अगर किसी बीमारी के चलते एक दशक में एक करोड़ लोगों की मौत हो सकती है तो वह किसी युद्ध से भी ज़्यादा खतरनाक है। ऐसे में हम अभी से सावधानी नहीं बरतते हैं और तैयारी नहीं करते हैं तो अगली महामारी ‘इबोला’ से भी ख़तरनाक होगी।
आने वाले समय में कोई ऐसा वायरस पैदा हो सकता है जिससे प्रभावित लोगों पर शुरुआत में बहुत असर न पड़े। वह आराम से हवाई यात्राएं करें, बाज़ार जाएँ और सार्वजनिक जगहों पर घूमें। लोगों को भले ऐसा लगे कि वह ठीक हैं लेकिन असल में वह बेहद ख़तरनाक बीमारी की चपेट में हों।’

साल 2016
बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में बिल गेट्स ने कहा था कि मैं हमेशा अपनी फिंगर्स क्रॉस (उम्मीद बनाए रखने का भाव) ही रखता हूँ। क्या पता आने वाले 10 सालों में किसी बड़े फ्लू जैसी कोई बीमारी न आ जाए क्योंकि दुनिया हमेशा से ऐसे ख़तरों से घिरी रही है (और रहेगी)। इबोला और ज़ीका वायरस इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण है कि दुनिया में इन महामारियों से आपातकाल जैसे हालात बनते हैं। लेकिन अफ़सोस दुनिया उन हालातों का सामना करने के लिए बिलकुल तैयार नहीं रहती है।

साल 2017
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर हर साल होने वाली ‘म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस’ में भी गेट्स ने कई उल्लेखनीय बातें कही थीं। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत में ही कहा कि वह कॉन्फ्रेंस का हिस्सा महज़ एक कारण के चलते बने। ‘हम जितना समझते हैं दुनिया की कड़ियाँ उससे कहीं ज़्यादा मज़बूती से जुड़ी हुई हैं।’
जिसका एक मतलब यह भी है कि स्वास्थ्य सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। बिल गेट्स ने कहा, जानकारों के मुताबिक हवा में पैदा हुआ बैक्टीरिया (पैथोजन) महज़ एक साल के भीतर 3 करोड़ लोगों की जान ले सकता है। इतना ही नहीं आने वाले 10 से 15 सालों के बीच यह कभी भी जन्म ले सकता है।
मैं जितना बड़ा ख़तरा जलवायु परिवर्तन और परमाणु युद्ध को मानता हूँ उतना ही बड़ा ख़तरा ऐसी बीमारियों को भी मानता हूँ। जितना ज़रूरी जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों के लिए तैयार होना है उतना ही ज़रूरी महामारियों के लिए तैयार होना भी है।

साल 2018
अप्रैल 2018 के दौरान Massachusetts Medical Society के सलाना Shattuck आयोजन में बोलते हुए बिल गेट्स ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा दुनिया भले बहुत बड़े पैमाने पर तरक्की कर रही हो लेकिन एक क्षेत्र ऐसा है जिसमें पूरी दुनिया अभी बहुत पीछे है। वह है किसी महामारी के लिए पहले से तैयार रहना। हमें इस बात के लिए सोचना चाहिए क्योंकि इतिहास ने हमें यही सिखाया है आने वाले समय में जानलेवा महामारियाँ होंगी।

युद्ध की तरह करनी होगी तैयारी
अंत में गेट्स ने कहा “जिस तरह सेनाएँ युद्ध के लिए तैयारी करती हैं ठीक वैसे दुनिया को महामारियों के लिए तैयारी करनी चाहिए।” बिल गेट्स के साथ सबसे अच्छी बात यही है कि वह ऐसे संगीन मसलों पर महज़ बात नहीं करते बल्कि कोशिशें भी करते हैं। बिल गेट्स और उनकी पत्नी मेलिंडा गेट्स की संस्था ने इन्फ़्ल्युएंजा फैलने पर काफी सहायता राशि दी थी।
साथ ही साथ इसका टीका तैयार कराने के लिए काफी शोध भी कराए थे। साल 2017 के दौरान दावोस में उनकी संस्था ने Epidemic Preparedness Innovations के साथ मिल कर बड़ा अभियान चलाया था। अंत में उन्होंने एक ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया था जिसकी मदद से आने वाले समय में किसी महामारी का सामना करना आसान हो।

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