जया एकादशी का व्रत क्‍यों करतें हैं, देंखें तिथि व महत्‍व

इस वर्ष जया एकादशी 23 फरवरी को पड़ रही है। इस दिन विष्णु जी की पूजा की जाती है। उन्हें पुष्प, जल, अक्षत, रोली तथा विशिष्ट सुगंधित पदार्थों अर्पित किए जाते हैं। इस दिन व्रत करना बेहद फलदायी होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत करता है उसे को भूत-प्रेत, पिशाच जैसी योनियों में जाने का भय नहीं रहता है। इससे व्यक्ति को उसके सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्त और महत्व।

जया एकादशी का शुभ मुहूर्त:

एकादशी तिथि प्रारम्भ- फरवरी 22, सोमवार शाम 05 बजकर 16 मिनट से

एकादशी तिथि समाप्त- फरवरी 23, मंगलवार शाम 06 बजकर 05 मिनट तक

जया एकादशी पारणा मुहूर्त- 24 फरवरी, बुधवार को सुबह 06 बजकर 51 मिनट से सुबह 09 बजकर 09 मिनट तक

अवधि: 2 घंटे 17 मिनट

जया एकादशी का महत्व:
हिंदब धर्मग्रंथों में इसका महत्व बहुत अधिक बताया गया है। इस उल्लेख भाव्योत्तार पुराण और पद्म पुराण में भगवान कृष्ण और राजा युधिष्ठिर के बीच बातचीत के रूप में मौजूद है। इस दिन दान-पुण्य का भी अधिक महत्व होता है। इस दिन जो व्यक्ति दान करता है वो कई गुण अर्जित करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा था कि माघ शुक्ल एकादशी को किसकी पूजा करनी चाहिए और इसका क्या महात्मय है। इस पर श्री कृष्ण ने उत्तर दिया कि इसे जया एकादशी कहते हैं। यह बेहद पुण्यदायी होती है। इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को भूत-प्रेत, पिशाच जैसी योनियों में जाने का भय नहीं रहता है।

नोट- उपरोक्‍त दी गई जानकारी व सूचना सामान्‍य उद्देश्‍य के लिए दी गई है। हम इसकी सत्‍यता की जांच का दावा नही करतें हैं यह जानकारी विभिन्‍न माध्‍यमों जैसे ज्‍योतिषियों, धर्मग्रंथों, पंचाग आदि से ली गई है । इस उपयोग करने वाले की स्‍वयं की जिम्‍मेंदारी होगी ।

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